जैन मंदिर की जमीन को लेकर ट्रस्ट अध्यक्ष के साथ मारपीट, जांच में जुटी पुलिस

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बीना में शुक्रवार की शाम को श्री नाभिनंदन दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के साथ कुछ लोगों ने मारपीट कर दी। खून से लथपथ उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले जैन मंदिर ट्रस्ट की ओर से कुछ जमीन खरीदी गई थी, जिसपर कुएं की खुदाई की जानी है। खुदाई के कार्य को लेकर श्री नाभिनंदन दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष राकेश पिता गुलाबचंद सराफ (62) निवासी इटावा, कुछ मजदूरों को ट्रस्ट की जमीन दिखाने गए थे। जहां पर काम शुरू किया जाना है, लेकिन वहां पहुंचते ही समाज के कुछ लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज करना शुरू कर दिया और उनके सिर में पत्थर मारकर उन्हें घायल कर दिया। घटना की जानकारी लगते ही समाज के अन्य लोग मौके पर पहुंचे और अध्यक्ष को घायल अवस्था में सिविल अस्पताल लेकर आए, जहां उनका इलाज किया गया।

घायल ने बताया कि कुछ दिनों पहले ट्रस्ट ने जमीन खरीदी थी, जहां पर कुछ लोग अतिक्रमण किए हुए हैं। जब वहां पर मजदूरों को जगह दिखाने के लिए गए तो सोनू, मोनू व जिनेश्वर नाम के व्यक्ति ने उनके साथ मारपीट कर दी। घटना में एक मजदूर को भी चोटें आई हैं। इसकी जानकारी लगते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल के बयान दर्ज किए। पुलिस ने बताया कि जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।