चुनाव से पहले राहत, सस्ता हुआ एलपीजी सिलेंडर

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आज से नए वित्त वर्ष की शुरुआत हुई है और इसके पहले ही दिन गैस की कीमतों पर बड़ी राहत मिली है। 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम वही हैं।

देश में लोकसभा चुनाव 2024 होने जा रहे हैं और इससे पहले एलपीजी की कीमतों पर बड़ी राहत मिली है। नए वित्त वर्ष के पहले दिन अप्रैल को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती की है। हालांकि, ये कटौती कॉमर्शियल गैस सिलेंडर पर की गई है। 19 किलोग्राम वाला एलपीजी सिलेंडर 32 रुपये तक सस्ता हो गया है। नए रेट आज से लागू हो गए हैं।

नए वित्त वर्ष के पहले दिन 1 अप्रैल 2024 को कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर प्राइस में कटौती कर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। कीमतों में ताजा कटौती के बाद अब राजधानी दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का दाम 30.50 रुपये कम होकर 1764.50 रुपये हो गया है। कोलकाता में कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 32 रुपये कम हुए है और यहां पर अब ये 1879 रुपये का मिलेगा। मुंबई की बात करें तो यहां पर एक सिलेंडर की कीमत 31.50 रुपये की कटौती के साथ घटकर 1717.50 रुपये और चेन्नई 30.50 रुपये की कमी के साथ 1930 रुपये कर दी गई है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।