भोपाल में दोपहर के बाद तेजी से बरसे बादल, 11 अप्रैल तक बारिश ओले का अलर्ट

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भोपाल में सोमवार दोपहर तेज बारिश हुई। कोलार इलाके में तेज आंधी भी चली। सुबह से शहर में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों में आंधी के साथ तेज बारिश का अनुमान जताया है। इससे पहले रविवार को भी दिनभर धूप-छांव और बूंदाबांदी के बाद शाम को तेज बारिश हुई थी।

मौसम विभाग ने 11 अप्रैल तक भोपाल में बारिश के साथ ओले गिरने का भी अलर्ट जारी किया है। 9 अप्रैल को असर ज्यादा रहेगा। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी आने की वजह से प्रदेश में मौसम बदला है। इसका असर भोपाल में भी दिखाई दे रहा है।

अप्रैल महीने में भोपाल में तेज गर्मी और बारिश का ट्रेंड है। पिछले 10 साल में टेम्प्रेचर 42 से 43 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जबकि 2014 से 2023 के बीच 10 में 7 साल बारिश भी हो चुकी है। पिछले साल 22.6 मिमी से ज्यादा पानी गिरा था। वर्ष 2014 से 2023 के बीच 7 साल बारिश हुई है। साल 2016. 2017 और 2022 को बारिश नहीं हुई थी, जबकि पिछले साल 22.6 मिमी यानी, पौन इंच से अधिक पानी गिरा था।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।