नई दवा लॉन्च: डायबिटीज के इलाज में क्रांति लाएगी ‘ग्लुकोफ्रीट’
मुंबई, 16 नवंबर 2024:

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भारत की अग्रणी फार्मास्युटिकल कंपनी सन फार्मा ने आज नई दवा ‘ग्लुकोफ्रीट’ को बाजार में उतारने की घोषणा की। यह दवा टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए विकसित की गई है और इसे अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान के माध्यम से तैयार किया गया है।

ग्लुकोफ्रीट की खासियतें:

1. एक बार दैनिक खुराक: मरीजों को दिन में केवल एक बार दवा लेनी होगी, जिससे दवा का पालन करना आसान होगा।


2. ब्लड शुगर पर नियंत्रण: दवा न केवल ब्लड शुगर को नियंत्रित करेगी, बल्कि शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को भी बढ़ाएगी।


3. कम साइड इफेक्ट्स: अन्य दवाओं की तुलना में इसमें साइड इफेक्ट्स काफी कम बताए जा रहे हैं।



कंपनी का बयान:
सन फार्मा के सीईओ ने लॉन्च के दौरान कहा, “ग्लुकोफ्रीट भारतीय डायबिटीज मरीजों के लिए जीवन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हमारी टीम ने इसे वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित किया है।”

दवा अगले हफ्ते से देशभर के प्रमुख अस्पतालों और फार्मेसियों में उपलब्ध होगी। शुरुआती चरण में इसका मूल्य प्रतिस्पर्धात्मक रखा गया है ताकि यह सभी वर्गों तक पहुंच सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा डायबिटीज उपचार में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है, विशेषकर ऐसे समय में जब भारत को “डायबिटीज की राजधानी” कहा जाता है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।