दिल्ली अस्पताल में 5 मरीजों की मौत, लापरवाही का आरोप
नई दिल्ली, 16 नवंबर 2024:

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राजधानी दिल्ली के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल, में बीती रात पांच मरीजों की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि यह घटना अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण हुई, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया है।

घटना का विवरण:
सूत्रों के अनुसार, आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी के चलते पांच मरीजों की हालत बिगड़ गई और समय पर मदद नहीं मिल पाने से उनकी मौत हो गई। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं।

प्रशासन का बयान:
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा, “ऑक्सीजन आपूर्ति में अचानक आई खराबी को ठीक करने की पूरी कोशिश की गई थी। घटना की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित कर दी गई है।”

परिजनों का विरोध:
मृतकों के परिजनों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्टाफ ने मरीजों की बिगड़ती हालत पर ध्यान नहीं दिया। एक परिजन ने बताया, “हमने कई बार डॉक्टरों और नर्सों को बुलाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।”

सरकार की प्रतिक्रिया:
स्वास्थ्य मंत्री ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है और तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

जांच के आदेश:
दिल्ली पुलिस ने भी घटना की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक जांच में ऑक्सीजन प्लांट में तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आई है, लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही असल कारण स्पष्ट हो सकेगा।

यह घटना एक बार फिर अस्पतालों में बुनियादी सेवाओं की निगरानी और सुधार की जरूरत को उजागर करती है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।