अस्पताल में लापरवाही से 8 मरीजों की मौत, जांच के आदेश
लखनऊ, 16 नवंबर 2024:

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक निजी अस्पताल में कथित लापरवाही के कारण 8 मरीजों की मौत का मामला सामने आया है। घटना शिवा मेडिकल सेंटर में हुई, जहां आईसीयू में ऑक्सीजन आपूर्ति अचानक बाधित हो गई।

घटना का विवरण:
मरीजों के परिजनों का आरोप है कि रात 2 बजे के करीब अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई रुकने के कारण आईसीयू में भर्ती मरीजों की स्थिति बिगड़ गई। अस्पताल प्रशासन ने तकनीकी खराबी का हवाला देते हुए समस्या को स्वीकार किया, लेकिन उचित समय पर कार्रवाई नहीं की जा सकी।

सरकार की प्रतिक्रिया:
मुख्यमंत्री कार्यालय ने घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

परिजनों का गुस्सा:
घटना के बाद अस्पताल के बाहर मृतकों के परिजनों ने प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने घटना को छुपाने की कोशिश की। परिजनों ने अस्पताल की सेवाओं पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की।

अस्पताल का बयान:
अस्पताल के प्रबंध निदेशक ने बयान जारी कर कहा कि, “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। तकनीकी टीम से ऑक्सीजन सप्लाई में खराबी की जानकारी मिलने के बाद हमने समस्या को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन समय रहते नहीं कर सके।”

जांच प्रक्रिया:
घटना की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है। समिति एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यदि अस्पताल की लापरवाही साबित होती है, तो लाइसेंस रद्द करने समेत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना अस्पताल प्रबंधन में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को फिर से उजागर करती है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।