दहेज में कार न मिलने पर छह साल बाद बहू को घर से निकाला महिला की तहरीर पर थाने में दर्ज हुयी एफआईआर

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ललितपुर। गांधीनगर प्रशान्ति विद्या मंदिर के पीछे रहने वाली सुचित्रा जैन पुत्री सुरेशचंद्र जैन ने पुलिस अधीक्षक को तहरीर देकर बताया कि उसकी शादी 6 जून 2010 को मध्य प्रदेश के इन्दौर के थाना विजयनगर स्थित 52 सेक्टर डी स्कीम नं.78 गली नम्बर 2 निवासी जितेन्द्र जैन पुत्र सगुनचंद्र के साथ जैन धर्मशास्त्र अनुसार हुयी थी। बताया कि शादी में उसके माता-पिता ने अपनी हैसीयत अनुसार दान दहेज में 7 लाख रुपये नकद और कुल शादी 15 लाख रुपये में की थी। बताया कि शादी के बाद पति जितेन्द्र, ससुर सगुन, जेठ आशीष, देवर आलोक द्वारा चार पहिया कार की मांग करने लगे। विरोध करने पर उसे शादी के बाद से ही उलाहना देना शुरू कर दिया गया। 15 दिन ससुराल में रूकने के बाद उसके पिता सुरेशचंद्र व भाई संकेत उसे लेने इंदौर पहुंचे तो ससुरालियों ने एकराय होकर विवाद कर दिया और बेइज्जत किया। आरोप है कि उसकी सास मुन्नीदेवी ने उसका सारा सोने-चांदी को जेवर उतरवाकर अपने साथ रखते हुये उसे ललितपुर पिता व भाई के साथ भेज दिया। कुछ समय पश्चात जब ससुराली उसे लेने ललितपुर आये तो यहां भी उन्होंने कार की मांग उठायी। सचित्रा ने बताया कि उसके ससुराली उसे लगातार प्रताडि़त कर रहे हैं और उसका पति भी परिजनों के कहने पर उससे अलग रहने लगा। आरोप है कि 6 साल गुजारने के बावजूद वह अपने मायके आ गयी। जहां उसने सामाजिक पंचायत में रिश्तेदारों के बीच बात रखी, जिसके बाद ससुराली उसे फिर ले गये। लेकिन तब से उसे और प्रताडि़त किया गया। बताया कि 22 मई 2022 को उसके पिता व भाई इंदौर पहुंचे तो उसने अपने साथ हुये उत्पीडऩ की बात कही, जिस पर उसके पिता व भाई उसे लेकर ललितपुर आ गये। तब से ससुरालियों ने उसकी कोई खबर नहीं ली। महिला की तहरीर व एसपी के आदेश पर पुलिस ने ससुरालियों के खिलाफ 498 ए, 323, 504 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।



सीमेंट व्यापारी ने लखनऊ की फर्म संचालक पर लगाया रुपये हड़पने का आरोप
मारपीट कर फर्म बंद कराने की भी धमकी देने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज
ललितपुर। महरौनी में ज्ञानसागर फर्टीलाइजर फर्म के संचालक आमोद कुमार जैन पुत्र मनोहरलाल ने एसीजेएम न्यायालय में वाद दायर करते हुये लखनऊ निवासी व्यापारी पर रुपये न देने और फर्म पर आकर गालियां देते हुये मारपीट करने का आरोप लगाया है। आमोद कुमार ने न्यायालय को अवगत कराया कि उसकी फर्म से लगभग तीन वर्ष से ललितपुर में नहरों को पक्का करने के लिए लखनऊ के गोमतीनगर थाना अंतर्गत विपुल खण्ड स्थित फर्म एवरग्रीन इन्फ्राविल्ड के संचालक नवीनदुल्ला फैजी पुत्र जैनइल्ला फौजी द्वारा सीमेंट खरीद किया जा रहा था। बताया कि उक्त फर्म से उसे 1 करोड 56 हजार रुपये चाहिए थे, जिसमें लखनऊ की फर्म द्वारा 6 लाख 50 हजार रुपया ही दिया गया, जबकि शेष सीमेंट का भुगतान 94 लाख 6 हजार रुपये अभी भी भुगतान नहीं किया गया है। बताया कि बीती 29 सितम्बर को सुबह करीब 9 बजे जब वह अपनी महरौनी फर्म पर था, तभी नवीनदुल्ला फैजी उसकी फर्म में घुस आया और सीमेंट देने की मांग करने लगा, जिस पर पीडि़त ने पुराना बकाया भुगतान की बात कही। इस बात से क्षुब्ध होकर उक्त फर्म संचालक द्वारा पीडि़त के साथ गालियां देते हुये मारपीट पर आमादा हो गया। शोरगुल होने पर मौके पर ग्राम रजौला व हाल महरौनी निवासी रामकुमार पुत्र सरदार सिंह राजपूत व ग्राम कुरौरा निवासी उदयभान सिंह पुत्र अमन सिंह ने उसे बचाया। आरोप है कि नवीनदुल्ला ने उसे फर्म बंद कराने की धमकी दी। मामले की शिकायत करने पर पुलिस ने कार्यवाही नहीं की और एसपी को भी शिकायती पत्र भेजा गया। अब न्यायालय के आदेश पर महरौनी पुलिस ने फर्म संचालक आमोद कुमार जैन की तहरीर पर लखनऊ फर्म संचालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 316 (2), 352, 351 (2) व 131 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।