पुरातत्व विभाग व्दारा गौरझामर किले की बनाई जा रही  बाउंड्री से गौरझामर का इतवारा बाजार प्रभावित नगरवासियो ने किया विरोध

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गौरझामर। के प्राचीन गौडवाना ऐतिहासिक किले के प्रवेश व्दार पर पुरातत्व विभाग व्दारा पक्की दीवार बनाने की कवायत शुरु की जा रही है रविवार को ठेकेदार के माध्यम से बाउन्डी निर्माण की प्रक्रिया को अंजाम दिये जाने से स्थानीय  इतवारा बाजार व दशहरा मेदान की अस्मिता समाप्त होने से गौरझामर के नागरिक विरोध मे सामने आ गये है बतादे की  सागर जिले में  गौरझामर का सबसे बडा हाट बाजार शताब्दी से लगता आ रहा है यह प्रसिद्ध इतवारा हाट बाजार व नवरात्रि पर होने वाले अखाड़े एवं  दशहरा के कार्यक्रम इसी किला परिसर मेंदान मे अनादि काल से आयोजित होते आ रहे है गौरझामर सर्किल के 70 ग्रामों का यह एकमात्र पोषक व  प्रमुख  हाट बाजार है जो रविवार के दिन इसी मैदान पर लगता है जिस पर अब संकट के  बादल नजर आ रहे हैं इस मैदान के सामने ही पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाला गौरझामर का प्राचीन गौड शासन काल का किला स्थित है   जिसको निरूपण करने हेतु पुरातत्व विभाग द्वारा दीवारों की छपाई एवं अंदर मिट्टी की खुदाई का कार्य किया जा रहा था किले के अंदर का यह कार्य चलने के उपरांत करीब दो माह पूर्व किले के मेंन गेट के बाहर 40 फीट दूरी से चूने की लेयर डाली गई थी जो मौके पर मौजूद कर्मचारी एवं ठेकेदार द्वारा बाउंड्री बाल निर्माण के लिए डालना बताई गई    तब  सरपंच बबीता विश्वकर्मा ने  पंचायत अधिकारी के साथ मौके  पर पहुंचकर ग्रामीणों की मौजूदगी में इसका विरोध करते हुए चूने की लेयर डाली जगह से बाउंड्री निर्माण  नहीं करने एवं इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों तक  आवेदन पत्र भेजने पर कार्य बंद किया गया था रविवार को इंदौर से गौरझामर आये  पुरातत्व विभाग  अधिकारियो व  ठेकेदार ने  पहुंचकर चूने की लेयर पुन डाली गई है   ग्रामवासियो  एवं पत्रकारो  के   पूछे जाने पर  ठेकेदार ने बताया की इस विषय पर  जबलपुर स्थित मुख्यालय के विभागीय  अधिकारी से बात करने व  इस पर शीघ निपटारा करने की बात कही एवं अन्यथा की स्थिति में 5 दिवस के अंदर बाउंड्री निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जावेगा , मीडिया के प्रतिनिधियों को दूकानदारो व नागरिको ने बताया है की किले के बाहर बाजार परिसर मे बाउन्डी का निर्माण नही होना चाहिए इसे रोकने के लिए क्षेत्रिय विधायक श्री पटैरिया जी से अनुरोध किया गया है

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।