सनातन चेतना मंच दमोह पहुंचा कलेक्टेड, कलेक्टर श्री कोचर को ज्ञापन सौंपा

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दमोह/ सनातन चेतना मंच दमोह द्वारा बांग्लादेश के विरोध में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन, तहसील ग्राउंड में एकत्रित होकर ज्ञापन देने के लिए धर्मेंद्र सिंह मंत्री, संत,हिंदू संगठन और भी हजारों लोग कलेक्टेड पहुंचे. जहां कलेक्ट्रेट परिसर में कलेक्टर श्री कोचर के समक्ष ज्ञापन का वाचन दिनेश चौबे द्वारा होने के उपरांत ज्ञापन सौंपा गया,पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था में एसडीएम दमोह आर एल बागरी, सीएसपी अभिषेक तिवारी, आनंद राज टीआई, दमोह देहात मनीष कुमार, चौकी प्रभारी जबलपुर नाका आनंद कुमार, यातायात थाना प्रभारी भवानी सिंह, टीआई आनंद सिंह, पथरिया टीआई आनंद सिंह के अलावा भारी संख्या में पुलिस फोर्स, फायर ब्रिगेड, वज्र वाहन मौजूद रहा.

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।