दमोह/हम होगे कामयाव जागरूकता अभियान के अंतर्गत सायवर सेल, एस०जे०पी०यू शाखा दमोह, नव जागृति स्कूल दमोह में छात्र-छात्राओ को किया जागरूक

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दमोंह/पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे हम होगे कामयाव जागरूकता अभियान के अंतर्गत, पुलिस अधीक्षक दमोह के निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में सायवर सेल दमोह, एस० जे०पी०यू शाखा दमोह द्वारा संयुक्तए रूप से महिला सुरक्षा/सायवर सुरक्षा के विषय में विशेष जागरूकता कार्यक्रम नव जागृति स्कूल दमोह में आयोजित किया गया।
इस अभियान के दौरान छात्रों और छात्राओं को सायवर फ्रॉड जैसे डिजिटल अरेस्ट, फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन। च्ज्ञ फाइल्स, सोशल
मीडिया सुरक्षा, ओटीपी फ्रॉड आदि के साथ-साथ महिला सुरक्षा, महिला हेल्प लाईन 1090, चाईल्ड लाईन 1098, सायवर हेल्प लाईन 1930 नंबर
तथा सायवर पोर्टल www-cybercrime.gov.in के संबंध में जानकारी दी गई तथा सायवर फ्राड होने पर क्या करें और क्या न करें के संबंध में
बताया गया। साथ ही सायबर सेल दमोह की टीम द्वारा नगर दमोह में एटीएम स्पॉट पर एवं सार्वजनिक स्थानों पर आमजन के लिए सायबर अपराधों से बचने के उपाय के लिए “क्या करें तथा क्या न करें” संबंधी पंपलेटों का वितरण किया गया • सराहनीय कार्य
उक्त कार्यक्रम में, सायवर सेल दमोह की टीम एवं एसजेपीयू० शाखा की टीम द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।दमोंह ब्यूरों चीफ/अर्जुन सिंह लोधी

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।