चाचौड़ा ।छात्रों को कानून की जानकारी दी

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चाचौड़ा ।सीएमसीएलडीपी के छात्रों ने सीखी कानून की जानकारियां
मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम अध्ययन केंद्र-शासकीय कन्या महाविद्यालय बीनागंज विजयश्री जनकल्याण परिषद नवांकुर संस्था, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद और विधिक सेवा प्राधिकरण जिला गुना के संयुक्त संयुक्त तत्वाधान में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। विधिक साक्षरता शिविर में सुश्री रोमिका गुर्जर एडवोकेट एडीजे कोर्ट चांचौंडा़
ने छात्रों को विधिक साक्षरता अधिनियम 1987 के अंतर्गत महिलाओं,अनुसूचित जाति, जनजाति,18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गंभीर बीमारी से पीड़ित,₹500000 प्रतिवर्ष से कम आय वाले व्यक्ति को विधिक सेवा समिति  को या माननीय न्यायालय को आवेदन देकर निशुल्क न्याय प्राप्त करने  हेतु आवेदन दे सकते हैं,इसके अंतर्गत निशुल्क शासकीय अधिवक्ता, प्रकरण से संबंधित नकल,अनुवाद नकल,टाइप, कागजों का शुल्क और गवाहों का किराया खर्चा  सर्वोच्च न्यायालय तक निशुल्क प्रदान किया जाता है। रोमिका गुर्जर नें मास्टर ऑफ सोशल वर्क और बैचलर ऑफ सोशल वर्क के छात्रों को पास्को एक्ट के बारे में बताते हुए कहा कि 18 साल से कम आयु के बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं,इनको रोकने की जिम्मेदारी हम सब की है, गुड टच और बैड टच की जानकारी देते हुए बताया कि अगर कोई बच्चों को बेड टच करता है तो बच्चों को इसकी शिकायत अपनी मां और अपने स्कूल की महिला शिक्षिका घटना बताते हुए करना चाहिए, माता-पिता और अभिभावकों को बच्चों से मित्रवत व्यवहार किया जाना चाहिए,जिससे किसी बात को नहीं छुपा सके। घरेलू हिंसा अधिनियम के अंतर्गत महिलाओं के साथ होने वाली शोषण की घटनाओं को महिलाएं नजरअंदाज नहीं करें वह प्रोटेक्शन ऑफिसर महिला बाल विकास अधिकारी परियोजना ब्लॉक मुख्यालय पर आवेदन देने परियोजना अधिकारी स्वयं प्रकरण सीधे न्यायालय में प्रस्तुत करेगा। महिलाएं पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करने जाती हैं अगर एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं, तो सीधे न्यायालय में प्रकरण दर्ज करवा सकते हैं।
    बालिकाओं को निर्भीक होकर अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना चाहिए और अपने अधिकारों का उपयोग करना चाहिए यही महिला सशक्तिकरण है।
      सीपीसी राठौर ब्लॉक विकासखंड समन्वयक मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड चांचौड़ा ने संविधान में दिए मौलिक अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी देते हुए बताया कि हमें आर्टिकल 19 (एक) (अ) में हमें अपनी बात कहने का,विचार प्रकट करने का और लिखने का का अधिकार है, संविधान हमारा पवित्र ग्रंथ है।
  विनोद नागोरिया लीगल पैरा वालिण्टियर ने राष्ट्रीयखाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के बारे में विस्तार से बताया, राघवेंद्र राजोरिया पीएलवी ने राज्य बाल आयोग,किशोर बोर्ड,राज्य महिला आयोग और मध्य प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन-अधिकार और हम लोगों तक किस तरह आयोग को न्याय हेतु आवेदन भेजें और अपनी बेंच लगाकर किस तरह न्याय प्रदान करते हैं पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया।
अरविंद कुमार पारीक ने उपभोक्ता अधिनियम 1986 के अंतर्गत जानकारी देते हुए बताया कि उपभोक्ता मार्केट का राजा होता है हमें कोई भी वस्तु खरीदते समय हमेशा बिल लेना चाहिए कोई भी त्रुटि और खराबी होने पर जिला उपभोक्ता फॉर्म में स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से 20 लाख रुपए तक की राशि की न्याय हेतु प्रकरण दर्ज कर सकते हैं। ट्रेन में रिजर्वेशन होने पर अगर कोई सामान गुम हो जाता है तो रेलवे चोरी का सामान का भुगतान करता है, इस हेतु रेलवे पुलिस थाने में हमें एफआईआर दर्ज करवाना चाहिए। एक महिला की प्राइवेट बस में बैठने पर निकली हुई कील से साड़ी फट गई थी जिला उपभोक्ता फौरम ने उस  महिला को साड़ी की कीमत और वाद व्यय और वकील की फीस और गवाहों के खर्च का भुगतान किया, हमें कोई भी सामान क्रय करते समय बिल अवश्य लेना चाहिए इससे दुकानदार टैक्स की चोरी भी नहीं कर पाता है और हमें सामान खराब होने पर हम न्याय हेतु उपभोक्ता फॉर्म में जा सकते हैं यह हमारा मौलिक अधिकार है।
     कालू मीणा परामर्शदाता ने आहार व्यक्त किया।चाचौड़ा से संवाददाता चंद्र मोहन नामदेव

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।