शाजापुर ।अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा ग्राहक जागरण पखवाड़े का हुआ शुभारंभ

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शाजापुर। कालापीपल अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत द्वारा 16 दिसंबर से 31 दिसंबर 2024 तक आयोजित होने वाले ग्राहक जागरण पखवाड़ा  कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम  मुख्य अतिथि बैजनाथ पाटिल वरिष्ठ अध्यापक एवं भरतलाल परमार की अध्यक्षता मैं कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ सर्वप्रथम संगठन के प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद जी  के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित किया गयाl
मुख्य वक्ता पाटिल द्वारा संगठन का परिचय देते हुए  समाज में  संगठन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने वाला अखिल भारतीय स्तर का एकमात्र संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत है इसके अथक प्रयास से ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 तथा संशोधन अधिनियम 2019 का गठन हुआ। जिसमें उपभोक्ताओं के साथ हो रही ठगी से न्याय पाने हेतु प्रत्येक ग्राहक न्यायालय जा सकता हैं जिसमें वकील होना आवश्यक नहीं हैl उन्होंने बताया कि वर्तमान परिपेक्ष में पेट्रोल पंप पर, रसोई गैस सिलेंडर में, नापतोल में, ज्वेलरी में, चिकित्सा के क्षेत्र में, खाद्य पदार्थों में मिलावट इत्यादि क्षेत्र में ग्राहक ठगा जा रहा है जिसका एकमात्र कारण ग्राहकों में जागरूकता का अभाव हैl संगठन के द्वारा बिल्डरों से ग्राहकों की सुरक्षा हेतु रियल एस्टेट प्राधिकरण (रेरा) भी बनवाया गयाl जिला अध्यक्ष केशर सिंह परमार एडवोकेट ने बताया गया कि अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत संगठन की स्थापना सन 1974 को हुई थी जिससे संगठन प्रत्येक वर्ष 24 दिसंबर को राष्ट्रीय ग्राहक दिवस के रूप में मनाता है इसके अंतर्गत 16 दिसंबर से 31 दिसंबर तक ग्राहक जागरण पखवाड़ा कार्यक्रम चलता है जिसमें स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल  शासकीय कार्यालयों आदि में ग्राहक जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, कैशलेस सिस्टम, सोशल मीडिया के खतरे, भ्रामक विज्ञापन, साइबर क्राइम से सुरक्षा तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे ज्वलंत मुद्दों पर ग्राहकों को जागरूक करने हेतु संगठन कार्यशालाएं आयोजित करता हैl इसी क्रम में जागरण कार्यक्रम में प्रबुद्ध जनों के मध्य नई परिवहन नीति, अनावश्यक बैंक चार्जेस इत्यादि विषयों को लेकर संगोष्ठी आयोजित करता हैl
ग्राहक प्रबोधन कार्यक्रम में ग्राहक संरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन बिल, उपभोक्ता फॉर्म की कार्यप्रणाली, सूचना का अधिकार, जीएसटी का ग्राहक पर प्रभाव इत्यादि विषयों पर भी चर्चाएं की जाएगीl
संगठन का प्रयास है कि इस पखवाड़े में जिले की समस्त तहसील एवं कस्बों में जाकर जन जागरण कार्यक्रम आयोजित कर अधिक से अधिक ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगाl
जिला अध्यक्ष ने  ग्राहक बंधुओ से संगठन के विचारों से जुड़ने हेतु अपने अनुभव साझा किएl
कार्यक्रम के अतिथि पाटिल द्वारा इस जन जागरण कार्यक्रम में सहयोग करने हेतु आश्वासन दिया गयाl
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कंटेंट क्रियेटर केशव आचार्य पर्यावरण प्रमुख मालवा प्रांत, जितेन्द्र कुमार, लक्ष्मण परमार, विनोद सर, देवराज परमार, समंदर राजपूत, नारायण विश्वकर्मा, गजराज सिंह, केदार सिंह परमार, बने सिंह फौजी, अशोक पंवार, नेमीचंद परमार आदि उपस्थित रहे l कार्यक्रम का संचालन संगठन के जिला अध्यक्ष केशर सिंह परमार वकील द्वारा किया गया एवं आभार तहसील अध्यक्ष राजेश परमार ने मानाlटुडे एमपी एक्सप्रेस….. दिलीप महेश्वरी

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।