ललितपुर।देवोदय पूजन मंडल ने देवगढ़ में मनाया वर्ल्ड मेडिटेशन डे*
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ललितपुर ।21 दिसंबर को “मेडिटेशन दिवस” (Meditation Day) मनाया जाता है, जिसे आज पूजन मंडल  देवोदय देवगढ़ जी में मनाया साधको ने पहले योग पूजन ध्यान किया जो मानसिक शांति, आत्म-संयम, और तंदरुस्ती के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक खास दिन है। यह दिन हमें ध्यान की शक्ति को समझने और उसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने की प्रेरणा देता है।

ध्यान (मेडिटेशन) केवल एक मानसिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह तनाव को कम करने, आत्मविश्वास बढ़ाने, और मानसिक स्पष्टता पाने में मदद करता है। जब हम अपने विचारों को शांत करते हैं और अपने भीतर की आवाज़ को सुनते हैं, तो हम अपने जीवन को अधिक सकारात्मक रूप से देख सकते हैं और चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं।
इस मौके पर अंकुर जैन सानू बाबा ने बताया की
मेडिटेशन दिवस पर हमें यह याद रखना चाहिए कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। इसे नियमित रूप से करने से हम अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं और आंतरिक शांति को महसूस कर सकते हैं। इस दिन का उद्देश्य लोगों को ध्यान के लाभों के प्रति जागरूक करना और उन्हें अपने जीवन में इस अभ्यास को शामिल करने के लिए प्रेरित करना है।

मनीष जैन मंगू ने कहा की आज के इस खास दिन पर हम संकल्प लें कि हम अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें, प्रतिदिन कुछ समय ध्यान में व्यतीत करें और आत्म-संयम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
इस मौके पर अनिल जैन देवगढ़,शैलेश जैन पिंटू,पुनीत जैन,अंकित जैन अंकु,वासु जैन, संतोष बुखारिया,आलोक काला,आदि उपस्तिथ रहे
*संवाददाता सुरेंद्र सपेरा*

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।