गढ़ाकोटा ।बसंत पंचमी के पावन पर्व पर किया गया ध्वजारोहण

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गढ़ाकोटा नगर के गुंजौरा रोड स्थित पानी फिल्टर के पास श्री कृष्ण प्रणाम जी धर्म के आश्रम प्राणनाथ मंदिर है जहां पर प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भव्य दिव्य महा आरती एवं ध्वजारोहण भजन संध्या की गई जिसमें सैकड़ो की संख्या मैं सुंदरसाद पधारे कार्यक्रम के आयोजन राकेश प्रजापति जी के द्वारा बताया गया कि यहां पर सभी की मनोकामना पूर्ण होती है एवं दूर-दूर से लोग आते हैं और श्रद्धा भक्ति के साथ संध्या भजन एवं महा आरती में शामिल होते हैं इसके बाद सभी श्रद्धालु भक्तों के सहयोग से भंडारा भी किया जाता है जो जो भी यहां पर सच्ची श्रद्धा भक्ति के साथ अर्जी लगता है उनकी मनोकामना पूर्ण होती है एवं जिनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वह अपने श्रद्धा भाव के साथ जो भी सेवा होती है वह प्राणनाथ मंदिर के दरबार में सेवा के रूम में करते हैं

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।