देवास । सिटी कोतवाली थाना प्रभारी लाइन अटैच, युवकों के मुंडन के मामले के बाद कार्रवाई

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देवास। चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम की जीत के बाद हुए विवाद में नया मोड़ आया है। एसपी पुनीत गेहलोत ने कोतवाली थाना प्रभारी अजय गुर्जर को लाइन अटैच कर दिया है। मामला सयाजी द्वार पर जश्न के दौरान हुई हुड़दंग का है। इस दौरान पुलिस ने 10 युवकों को गिरफ्तार कर उनका मुंडन करवाया और शहर में जुलूस निकाला था। घटना का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें एक पुलिस कर्मी एक दुकान संचालक से मारपीट करता दिखा। इस पर एसपी ने तत्काल उस पुलिस कर्मी को लाइन अटैच किया था।
मंगलवार को विधायक गायत्री राजे पवार ने एसपी कार्यालय पहुंचकर इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने एसपी से लगभग 20 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा की। विधायक ने सभी युवकों की जल्द रिहाई की मांग की। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों को एसडीएम कोर्ट में पेश किया। उन्हें मुचलके पर रिहा कर दिया गया। वर्तमान में पूरे प्रकरण की जांच एएसपी जयवीर सिंह भदोदिया कर रहे हैं।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।