88 साल की शतरंज खिलाड़ियों ने दिखाया खेल का जलवा

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

बीपीसीएल के सहयोग से समन्वय मंडपम संस्था द्वारा प्रोजेक्ट लक्ष्य के अंतर्गत आयोजित द्वितीय फीडे रैपिड रेटिंग शतरंज टूर्नामेंट का रविवार को समापन हुआ, दो दिवसीय इस टूर्नामेंट में देशभर के 8 राज्यों के 250 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। इस टूर्नामेंट के विजेता, दिल्ली से आए खिलाड़ी जगरीत मिश्रा रहे।
इस टूर्नामेंट की खास विशेषताएं यह थी कि इसमें 8 साल से लेकर 88 वर्षीय खिलाड़ी खेलते दिखे।
समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार जी उपस्थित रहीं, इनके अलावा सांदीपनि विद्यालय प्राचार्य मंजू यादव, एक्सीलेंस स्कूल प्राचार्य एस पी तिवारी जी, रविंद्र जैन बार कौसिल अध्यक्ष, पार्षद भारती राय , सोनाली राय जन भागीदारी अध्यक्ष, बीपीसीएल से जयदीप पंसारी, जन भागीदारी अध्यक्ष सोनाली राय, बीपीसीएल बीना रिफाइनरी से सचिन देशकर जी, गणेश पाटेर हरिओम मिश्रा जी, संस्था समन्वय मंडपम के अध्यक्ष एम एल प्रजापति जी, सचिव सत्यजीत सिंह ठाकुर ,धर्मेंद्र सिंह ठाकुर , शतरंज प्रशिक्षक जफर खान, कुश्ती शिक्षक मनीष यादव, हर्ष ठाकुर आदि उपस्थित रहे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।