उत्कृष्टता विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य मंसूरी निलंबित :

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बीना/शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 बीना के प्रभारी प्राचार्य सीएम मंसूरी के अभ्रदता पूर्ण व्योहार को देखते हुए संभागायुक्त डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत ने तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। प्राचार्य मंसूरी द्वारा युवा खिलाड़ियों के साथ अभ्रदता करना, विद्यालयीन छात्र-छात्राओं और स्टाफ को अपने व्यक्तिगत हितों की पूर्ति के लिए रैली आदि में शामिल करना, विधि विपरीत प्रेसवार्ता आयोजित करना आदि कृत्य किए गए हैं।

अनुविभागीय अधिकारी के जांच प्रतिवेदन के बाद हुए निलंबित
जानकारी के अनुसार अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग बीना ने 31 जनवरी को प्रभारी प्राचार्य सीएम मंसूरी के खिलाफ प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था। हरिओम और अन्य द्वारा
29 जनवरी को उनके समक्ष उपस्थित होकर ज्ञापन व आवेदन दिया था। जिसमें बताया था कि वे सभी युवा विद्यालयीन खेल मैदान में कई वर्षों से अभ्यास करते आ रहे है।

शासन के निर्देशों के विरुद्ध प्रेस वार्ता में की थी अभद्र टिप्पणियां
22 जनवरी को प्राचार्य मंसूरी ने उनके साथ अभ्रदतापूर्ण व्यवहार किया। जिसकी शिकायत आवेदकों ने 181 पर की तो प्राचार्य ने शिकायत वापस लेने के लिए उनसे अभद्रता की। साथ ही शासन द्वारा जारी निर्देशों के संबंध में भी मंसूरी ने प्रतिकूल टिप्पणी की। शैक्षणिक संस्था में बगैर किसी अनुमति के शैक्षिणक समय में छात्र व छात्राओं के अध्ययन के लिए उपयोग किए जाने वाले कक्ष में प्रेसवार्ता की गई जो कि विद्यालयीन या शैक्षणिक कार्यों के विषय में नहीं थी।
शिकायत पर मामले की जांच कराई गई।

कलेक्टर की परीक्षण प्रतिवेदन पर कमिश्नर ने किया निलंबित

कलेक्टर दीपक आर्य ने प्रतिवेदन संभागायुक्त कार्यालय में पेश किया। जिसका परीक्षण करते हुए अनुशासनहीनता और सिविल सेवा आचरण अधिनियम का उल्लंघन होने पर प्रभारी प्राचार्य सीएम मंसूरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में मंसूरी का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सागर नियत किया गया है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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