कैसे पहुंचीं श्रीजी इंस्टिट्यूट, गढ़ाकोटा हॉस्पिटल की दवाइया

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गढ़ाकोटा/ संस्थान के फर्जीवाड़े और सरकारी दवाइयों की पड़ताल में श्रीजी संस्थान से जुड़े लोगों की एक सूची प्राप्त हुई थी जिसमें समन्वयक पद पर धनंजय प्रजापति को दिखाया गया है। डॉक्टर विनोद – प्रजापति, डॉक्टर सुमित प्रजापति को संस्थान में मेडिकल डॉक्टर बताया गया है। इसी सूची में विनेश पटेल, अरविंद कुर्मी और कुमारी पूजा रोहित को संस्थान में इंस्ट्रक्टर बताया गया। कुमारी अर्चना प्रजापति लैब असिस्टेंट हैं, मोहित प्रजापति रिसेप्शनिस्ट है एवं आकाश पटेल असिस्टेंड के पद पर है। जिसमें अरविंद कुर्मी सागर जिले की रहली जनपद के अंतर्गत उमरा कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में सीएचओ के पद पर पदस्थ हैं।

इसी प्रकार सुरखी की करैया निवासी डॉक्टर ओमप्रकाश मिश्रा, जो रहली की गढ़ाकोटा हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जब इस संबंध में गढ़ाकोटा हॉस्पिटल बीएमओ सूर्यांश से बात की तो उन्होंने बताया कि यहां पर डॉक्टर ओमप्रकाश मिश्रा पदस्थ नहीं है वह सीखने के उद्देश्य से सुरखी से एक डॉक्टर है पटेल उनके साथ आते हैं। जो दवाइयां श्रीजी संस्थान से जप्त की गई है उसकी जांच रिपोर्ट कल 10:00 बजे तक दमोह सीएमएचओ कार्यालय मिल कर दी जाएगी।

सूत्रों की माने तो गढ़ाकोटा हॉस्पिटल से कुछ दवाइयां के बैच क्रमांक हैं, वह दवाई गढ़ाकोटा हॉस्पिटल से श्रीजी संस्थान में पहुंची थी। अब इसे इत्तेफाक कहे या फिर कुछ ओर की एक तरफ श्रीजी संस्थान से संबंध रखने वाला ओमप्रकाश मिश्रा गढ़ाकोटा हॉस्पिटल में प्रैक्टिस करता है, तो वहीं दूसरी ओर गढ़ाकोटा हॉस्पिटल की कुछ दवाइयां श्रीज इंस्टिट्यूट में मिलती है यह जांच का विषय है। सभी व्यक्तियों का संबंध रहली विधानसभा से बताया जा रहा है जिस पर लोगों को राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्यवाही न होने की शंका जताई जा रही है।

इनका कहना है….

कमिश्नर कार्यालय से आदेश प्राप्त हुआ था कि जप्त की गई दवाइयां का परीक्षण करें कि वह शासकीय हैं या फिर नहीं जिसकी जांच का रिपोर्ट कमिश्नर कार्यालय में सपोर्ट कर दी गई है अब जांच का खुलासा वहीं से होगा।

डॉ सचिन मलैया उपसंचालक जेडी कार्यालय सागर उक्त मामले में जांच कमेटी बनाई गई थी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासनिक कार्यवाही वहीं पूर्ण करेंगे, जिन्होंने छापा मार कार्यवाही की थी।

डॉ मुकेश जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दमोह पंचनामा मांगा गया था जो बनाकर भेज दिया है, सीएमएचओ से पत्र आएगा उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी उसमें जांच चल रही है की दवाई कहां से प्राप्त हुई है उसके बाद जो निष्कर्ष निकलेगा कार्यवाही होगी।

शशिकांत पटेल बीएमओ पथरिया

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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