कोरोना के बाद के संकट: बढ़ती सर्दी में कोविड-19 के मामले फिर बढ़े

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नई दिल्ली, 16 नवंबर 2024: सर्दी के मौसम में कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में पिछले एक हफ्ते में संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी के मौसम में कोविड के संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि ठंड में लोग अधिक समय indoors बिताते हैं और एयर कंडीशनिंग सिस्टम के कारण हवा में वायरस फैलने की संभावना रहती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड के नए मामलों पर निगरानी रखने और टेस्टिंग को बढ़ाने के आदेश दिए हैं। दिल्ली में पिछले एक सप्ताह में कोविड के मामलों में 30% तक की वृद्धि देखी गई है। अस्पतालों में भी कुछ मरीजों की स्थिति गंभीर होने की खबरें आई हैं, हालांकि अभी तक किसी भी राज्य में लॉकडाउन की आवश्यकता नहीं पड़ी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि वे मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और सैंटाइजिंग के नियमों का पालन करें। साथ ही, कोरोना टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए नए अभियान चलाने की भी योजना बनाई गई है।

देशभर में अब तक कोरोना के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा चुका है, लेकिन महामारी के बाद भी सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर सर्दियों में।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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