क्या RJD के साथ जाकर पछता रहे हैं नीतीश कुमार? उपेंद्र कुशवाहा ने खोले अंदर के कई राज

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उपेंद्र कुशवाहा ने खोले जेडीयू के कई राज।- India TV Hindi

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उपेंद्र कुशवाहा ने खोले जेडीयू के कई राज।

पटना: JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। इन सब के बीच RLJD के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने JDU के कई राज खोले हैं। INDIA TV से बात करते हुए ललन सिंह के इस्तीफे पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उनका इस्तीफा देने के बाद से दिया गया बयान ही हास्यपद है, जिसे सुनकर कोई भी हंसेगा। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ललन सिंह इस्तीफा देकर कहते हैं कि चुनाव लड़ना है, इसलिए इस्तीफा दे रहा हूं, ऐसा कौन करता है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, उनको कहीं विदेश जाकर थोड़े चुनाव लड़ना था जो चुनाव क्षेत्र में नहीं घूम पाते। ये सब फिजूल की बातें हैं। सच यही है कि वह JDU से ज्यादा RJD के नेता के रूप में काम करने लगे थे। 

नीतीश कुमार को दिखाया गया सपना

इस सवाल पर कि मल्लिकार्जुन खरगे का नाम आगे बढ़ाने पर क्या नीतीश कुमार को बुरा लगा होगा? इसका जवाब देते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि ललन सिंह और कुछ अन्य लोगों ने नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का भरोसा दिया था, तो नीतीश कुमार को बुरा तो लगेगा ही। अब RJD के समर्थन से नीतीश कुमार इस स्थिति में पहुंच गए हैं। यह बात तो नीतीश कुमार को उसी दिन सोचनी चाहिए थी, लेकिन फिर भी इन लोगों ने नीतीश कुमार को यह सपना दिखाया। जिन लोगों ने नीतीश कुमार को यह भरोसा दिलाया उन लोगों ने इंडिया गठबंधन की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा पर एक शब्द बोलना भी मुनासिब नहीं समझा।

क्या कमजोर हो गए हैं नीतीश कुमार

नीतीश कुमार अब कमजोर हो गए हैं इस सवाल पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि निश्चित तौर पर नीतीश कुमार की स्थिति अब पहले की जैसी नहीं रही है। उन्होंने कहा कि नीतीश जी राजनीतिक रूप से कमजोर तो हो ही चुके हैं और रोज कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि JDU ज्यादा दिन सर्वाइव करने वाली पार्टी नहीं है। NDA से गठबंधन बदलकर इन्होंने उसी RJD के साथ जाने का फैसला लिया था जिस RJD से परेशान होकर लोगों ने छुटकारा पाने का काम किया था। अब जब आत्मघाती कदम उठाया उन्होंने तो JDU बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है और बढ़ते ही जाएगा। स्वाभाविक रूप से नीतीश जी कमजोर हैं और अभी और भी कमजोर होंगे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।