खेत पर ट्रॉली के नीचे दबकर दो साल के बच्चे की संदिग्ध मौत

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बारधा क्षेत्र में फसलों की कटाई करने आए मजदूर दंपती के 2 साल के बच्चे की मौत हो गई। घटना शुक्रवार सुबह की है, शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया। मामले में मर्ग कायम कर लिया है लेकिन पुलिस जांच में दुर्घटना की वजह साफ नहीं हो सकी। क्योंकि बच्चे के पिता सहित ग्रामीण पोस्टमार्टम नहीं कराने पर अड़े थे। पुलिस सख्ती के बाद दोपहर बाद पोस्टमार्टम हुआ। कटाई के लिए क्षेत्र में जबलपुर से ज्योति और संतोष कौल फरवरी में आए थे।

जानकारी के अनुसार आज वह काम पर नहीं गए थे। बच्चे के पिता संतोष के अनुसार वह बारधा के एक खेत में अनाज बीनने आए थे। वहां ट्रॉली के नीचे छांव में बच्चे को सुला दिया। इसी बीच हादसा हुआ है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सकी कि ट्रैक्टर कौन चला रहा था। वहीं बच्चे के सिर में पीछे तरफ चोट आई है और नाक से खून निकल रहा था।

अस्पताल के बाहर बैठी रोती रही मां- हादसे में 2 साल के मासूम को खो देने के बाद अस्पताल के बाहर परिसर में संतोष और ज्योति बैठे थे। पूछने पर जवाब नहीं दिया कि हादसा कैसे हुआ। तभी किसी का फोन आने पर संतोष ने पत्नी ज्योति को फोन दिया तो वह रो पड़ी। जानकारी लगते ही किसान भी अस्पताल पहुंचे लेकिन मेमो पुलिस को दे दिए जाने से मर्ग कायमी कर ली। घटना बारधा में रेल लाइन के प्रास खेत की है। पुलिस ने शुक्रवार को घटना स्थल का निरीक्षण नहीं किया। मामला जांच में लेते हुए पुलिस जांच में जुट गई है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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