देवास(नादौन) । नादौन पंचायत पर जांच के दिए आदेश,जल्द ही बैठेगी निष्पक्ष जांच=जनपद सीईओ आलिया खान*

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

देवास(नादौन) पिछले प्रकाशन में कन्नौद तहसील की नादौन पंचायत में हो रहे गबन के बारे में शासन को बताया गया था। जिसको लेकर अब कन्नौद जनपद सीईओ आलिया खान द्वारा टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला देवास जिले की कन्नौद तहसील की नादौन पंचायत में भ्रष्टाचार का है। कन्नौद तहसील की नादौन पंचायत में सारे कार्य में भ्रष्टाचार फूट फूट कर भरा पड़ा नजर आ रहा हैं। सरपंच सचिव की मनमानी से फर्जी बिल बनाने से नहीं कतरा रहे हैं। एक-एक लाख तक के बिल बिना हस्ताक्षर और सील मोहर के ऑनलाइन अपडेट हो रहे हैं। जिस पर शासन प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। आज डॉ मोहन यादव सरकार गली-गली और गांव-गांव कई योजनाओं को आमजन तक पहुंचा रहे हैं। जैसे स्वास्थ्य भारत मिशन हो या आवास योजना या नल जल योजना या हो पक्की सड़क सभी प्रकार की योजनाएं मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान की जा रही है। और शासन का खजाना भी जनता के हित के लिए पंचायत के खाते में डाला जा रहा है। लेकिन कुछ जनता के प्रतिनिधि जनता को ही और शासन प्रशासन को पलीता लगाने में जुटे हैं। और जनता जो अपना मत याने कि मतदान कर कर एक अध्यक्ष चुनती है जिसे हम सामान्य भाषा में सरपंच कहते हैं। वही अपने अधिकारों का अनुचित उपयोग कर शासन को चुना लगाने में जुटे हैं ऐसा ही आलम देवास जिले की खातेगांव  विधानसभा के अंतर्गत आने वाली पंचायत नादौन का है जहां पर सरपंच सचिव लापरवाही करते हुए शासन के नियम को ताक में रख कर आपस में मिलकर ऐसे बिल लगा रहे हैं जिसमें कई बिलों में हस्ताक्षर ही नहीं है। तो किसी में सील मोहर का अतापता तक नहीं है। और बिल एक के बाद एक पास भी होते जा रहे।

*21000 का कच्चा बिल तो 70980 का बिल भी नहीं चुके लगाने से*

प्रेमसिंह के नाम से 6 ट्राली का बिल 21000 का सी सी रोड निर्माण कार्य के तहत 23/11/2024 को  और 70980 का बिल वंदना ट्रेडर्स के नाम से 10/2/2025 को ऑनलाइन अपडेट किया गया। लेकिन दोनों ही बिलों में सरपंच सचिव के हस्ताक्षर और सील मोहर का भी अता-पता तक नहीं।

*1,18,800 का एक बिल अजीबो गरीब*

नादौन पंचायत में सेंधव इलेक्ट्रॉनिक द्वारा 118800 का बिल 18/11/2024 को लगाया गया जिसमें सील मोहर और सरपंच सचिव के हस्ताक्षर ही मौजूद नहीं। वही सामुदायिक भवन निर्माण में 45000 का बिल जय माता बोल कर लगा दिया ऑनलाइन जो कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।

*बिना GST के बिल भी लगाने से बाज़ नहीं आए सरपंच सचिव*

जी हां भाल खा इसब खा जो कि ग्राम रायपूरा तहसील कन्नौद की दुकान का बिल है। यह बिल जिसमें GST नंबर ही मौजूद नहीं है जो कि 100 या 200 का नहीं बल्कि 43200 की राशि का है। जो कि कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का बीज होते हुए नजर आ रहा है

*सोखता गड्ढा से लेकर सी सी रोड निर्माण में भी गबन*

नादौन पंचायत में सोखता गड्ढे बनाए गए थे जो की जमीनी स्तर  पर कम लागत और बिल में अधिक लागत दर्शाई गई। वही सी.सी रोड,नल जल योजना, मुख्यमंत्री आवास योजनाओं में भी भारी गड़बड़ी की गई है।

*पंचायत रोजगार सहायक भारत सिंह सेंधव ने दिया जवाब*

जिला संवाददाता द्वारा नादौन पंचायत के रोजगार सहायक से बात की गई तो रोजगार सहायक भारत सिंह सेंधव का यह कहना है कि एक दो बिल चढ़ जाता है तो उसमें इतनी बड़ी बात क्या है ऐसी 26000 पंचायत है। मध्य प्रदेश में जिसमें ऐसा काम होता है। आप उनसे क्यों नहीं पूछते हो और हमारे पीछे क्यों लगते हो ऐसी बात करके जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने हुए रोजगार सहायक भारत सिंह सेंधव नजर आए। वही कन्नौद जनपद सीईओ आलिया खान से इस विषय में बात हुई तो उनका कहना है कि मैने टीम गठित कर दी गई है। कुछ ही दिन में उस पंचायत पर बैठेगी। ओर ऐसा कुछ पाया जाता है तो निश्चित ही कार्रवाई की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।