देवास पीपलरावा। जनपद पंचायत टोंकखुर्द में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन में 311 जोड़े बधे परिणय सूत्र में

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देवास पीपलरावा ।  देवास जिले की टोंकखुर्द तहसील में मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह सम्मेलन,जिस में 311 जोड़े सामूहिक विवाह के लिए जनपद पंचायत टोंकखुर्द में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री विवाह और विधवा/तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह में मदद करने के लिए हर वर्ष आयोजित किया जाता है। 
वही शासन की योजना के मुख्य उद्देश्य से भी रूबरू हुए। ओर साथ ही सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना,विवाह में अनावश्यक खर्च को कम करना और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मदद करना , वित्त योजना के तहत, हर जोड़े की शादी के लिए 49,000 रुपये की व्यवस्था की जाती है। शासन द्वारा जिसमें से कहीं जिलों के विवाह के लिए जोड़े आते हैं।  जिसमें सभी जोड़ों का विवाह  संपन्न हुआ। साथ ही समरसता का संदेश देते हुए सभी दूल्हों को एक टेलर पर बिठाकर नगर के मुख्य मार्ग से बारात के रूप में जुलूस निकाला गया जिसमें गाजे बाजे से घोड़े,हाथी के माध्यम से एक भव्य बारात निकाली गई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।इस कार्यक्रम में शासन प्रशासन एवं महिला बाल विकास के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। सोनकच्छ क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक डॉ राजेश सोनकर, भाजपा जिला अध्यक्ष रायसिंह सेंधव,जिला पंचायत अध्यक्ष लीलाबाई भेरूलाल अटरिया, गौतम सिंह राजपूत,गौरवा सरपंच शेषनारायण पटेल, टोंकखुर्द जनपद अध्यक्ष पोप सिंह सेंधव, जनपद उपाध्यक्ष सुरेश सिंह चांदना सम्मसखेड़ी,जनपद सदस्य महेंद्र सिंह यशोना तालोद,न्यू श्रम जीवी पत्रकार संघ जिला अध्यक्ष सुनील चौहान सम्मसखेड़ी एवं जनपद पंचायत के सभी अधिकारी व कर्मचारी आदि मौजूद रहे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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