देवास ।जिले में अवैध मदिरा संग्रहण एवं विक्रय के विरुद्ध आबकारी विभाग ने कार्यवाही कर 02 प्रकरण दर्ज किए

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     देवास ।12 फरवरी 2025/ कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह के निर्देशानुसार तथा सहायक आबकारी आयुक्त श्रीमती मंदाकिनी दीक्षित के मार्गदर्शन में जिले में अवैध मदिरा संग्रहण एवं विक्रय के विरुद्ध आबकारी विभाग द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी कड़ी में आबकारी विभाग के दल ने   व्रत देवास अ में संत रविदास नगर, राधागंज के होटलों में  सर्चिंग की गई। तलाशी में 35 पाव देशी मदिरा प्लेन, 3 बोतल विदेशी मदिरा व्हिस्की, 13 बीयर केन, 12 पाव विदेशी मदिरा व्हिस्की* जप्त किए गए।  कुल 02 प्रकरण मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1)क के तहत पंजीबद्ध कर विवेचना में लिए गए, जप्त सामग्री का बाजार मूल्य लगभग 8940 रूपए है।
             आज की कार्यवाही में वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक डीपी सिंह आबकरी आरक्षक दीपक टटवाडे, निहाल खत्री एवं नगर सैनिक केदार चौधरी सम्मिलित रहे, इस प्रकार की कार्यवाही  निरंतर जारी रहेगी।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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