देवास ।महिला एवं बाल विकास परियोजना द्वारा साइबर सुरक्षा संबंधी कार्यशाला किया गया आयोजन
– सोशल मीडिया पर हो रही धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में दी जानकारी

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देवास। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के 10 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर महिला एवं बाल विकास परियोजना देवास ग्रामीण द्वारा साइबर सुरक्षा के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में परियोजना अधिकारी डॉ संदीप रूहल ने सोशल मीडिया पर हो रही धोखाधड़ी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ सोशल मीडिया पर फ्रॉड एवं बैंकिंग धोखाधड़ी निरंतर बढ़ रही है। इसके लिए क्या-क्या आवश्यक सावधानियां बरती जाएं उनके बारे में जानकारी दी।
परियोजना अधिकारी डॉ संदीप रूहल ने कहा कि अपने बैंक खाता नंबर आदि के बारे में जानकारी गोपनीय रखी जाए किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा नहीं करें। आवश्यकता होने पर आधार कार्ड की मास्क कॉफी ही शेयर करें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती ना करें एवं अपनी व्यक्तिगत जानकारी शेयर ना करें। व्हाट्सएप पर फोटो डाउनलोड के विकल्प को बंद कर दें। किसी भी अंतरराष्ट्रीय कॉल को अटेंड ना करें और उसको तत्काल ब्लॉक भी कर दें। महिलाओं को साइबर अरेस्ट के बारे में भी जानकारी दी गई। किसी भी अनजान व्यक्ति पर विश्वास ना करें भले ही वह आपकी निजी जानकारी के बारे में भी बता रहा हो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को करें। छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रहने के लिए भी सलाह दी गई। व्यक्तिगत सावधानी ही किसी भी बड़ी घटना को रोक सकती है और अपनी मेहनत की कमाई को अनजान हाथों में जाने से बचाया जा सकता है। इस दौरान कार्यशाला में  समस्त पर्यवेक्षक उपस्थित थे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।