देवास ।BMO डॉ शैलेंद्र ओरिया की लापरवाही से फर्जी डॉ जयंत विश्वास के हौसले बुलंदआखिर क्यों नहीं हो रही जयंत विश्वास के ऊपर कार्यवाही

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देवास ।सोनकच्छ क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक सातवें आसमान पर फैल रहा है। वहीं चौबारा जागीर में जयंत विश्वास नामक डॉक्टर अपनी डिग्री के दम पर ओर फर्जी लाइसेंस,बिना MP काउंसलिंग मेडिकल बोर्ड के सर्टिफिकेट के बिना ही विगत 20 साल से जयंत विश्वास चला रहा अपना क्लीनिक का टिपारा। जिसकी भनक ब्लॉक अधिकारी और जिला अधिकारी को अभी तक नहीं लगी। पिछले प्रकाशन में हमने प्रकाशित कर शासन प्रशासन को अवगत कराया लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुंभकरण की गहरी निंद्रा में अभी तक सो रहे हैं।अभी 7 दिन बीत चुके हैं। फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी अपनी चुप्पी सब बैठा है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ शैलेंद्र ओरिआ को हमारे संवाददाता द्वारा इस मामले से अवगत कराया गया था। लेकिन डॉक्टर शैलेंद्र ओरिआ पत्रकारों से किनारा करते हुए नजर आए।  ऐसा जान पड़ता है जैसे की स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कहीं ना कहीं इस मामले में लिप्त नजर आ रहा है। इसीलिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। ओर और लिप्त नहीं है तो फिर अभी तक इस विषय में कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठाया गया। यह भी एक चर्चा का विषय बनता है।
इसी को लेकर जिला अधिकारी CMHO मैडम से हमारे संवाददाता ने बात की तो को मैडम ने बताया कि मेरे संज्ञान में यहां मामला अभी आया है और आपके द्वारा बताया गया है अब में मेडिकल ऑफिसर डॉ शैलेंद्र ओरिया से बात कर इस मामले में जांच करवाऊंगी और निश्चित ही निष्पक्ष ऐसा कुछ पाया जाता है तो शक्ति सशक्त उसके खिलाफ कार्यवाही की जावेगी।  अब देखना यह है कि जिला स्वास्थ्य अधिकारी और प्रशासन इस विषय में क्या कार्रवाई करता है।

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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