धामनोद।सिद्ध क्षेत्र पावागरी उन में होने वाले पंचकल्याणक की तैयारियां अंतिम दौर में है साधु संतों का आगमन

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

धामनोद। इस आयोजन के लिए प्रारंभ हो चुका है प्रशासन भीइस आयोजन के लिए  तैयारी में जुटा हुआ हैं अधिकारी मौका मुआयना कर        व्यवस्थाओं की जानकारी ले रहे है
क्षेत्र के प्रचार मंत्री आशीष जैन लोनारा  ने बताया कि आयोजन के लिए साधु संतों का आगमन प्रारंभ हो चुका है 1 अप्रैल को गणीनि आर्यिका यशस्विनी माताजी एवं आर्यिका लक्ष्मी भूषण माताजी ससंघ का प्रवेश हो चुका हैं। आचार्य सुनीलसागरजी महाराज के शिष्य श्रुत श्री सागर जी, श्रुतेश सागरजी महाराज 2 अप्रैल को पहुंचे, जबकि गणचार्य  विराग सागर जी सागर जी महाराज के मूल संघ के मुनि  विवर्धन सागर जी महाराज ससंघ 25 पीछी का मंगल प्रवेश 5 अप्रैल को सुबह पावागिरी ऊन में सुबह 8 बजे होगा। जबकि चर्या  शिरोमणि आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ करीब 40 पीछी का प्रवेश संभवतः 7 अप्रैल को सुबह हो सकता है 7 अप्रैल से प्रारंभ होने वाले आयोजन मैं सुबह सर्वप्रथम घटयात्रा में महिलाएं सर पर कलर धारण कर भक्ति भाव से शामिल होगी, पश्चात ध्वजारोहण  भरत रितु जैन जीरभार वाले इंदौर करेंगे, मंडप उदघाटन क्षेत्र के अध्यक्ष हेमचंद मीना झझरी इंदौर करेंगे ।  समस्त आयोजन बाल  ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य धर्म चंद्र शास्त्री नई दिल्ली के
निर्देशन एवं सानिध्य में संपन्न होंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में नृत्य नाटिका का मंचन
शाम को प्रतिदिन संगीतमय, आरती भक्ति, शास्त्र प्रवचन के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत 7 अप्रैल को स्थानीय निमाड़  के कलाकारों द्वारा सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी 8 अप्रैल को शांतिनाथ दिगंबर जैन 20 पंथी मंदिर इंदौर से संचालित श्री शांति सागर पाठशाला के बच्चों द्वारा “संपत्ति तक चले मोक्ष पथ” नाटक की शानदार प्रस्तुति  प्रस्तुत की जाएगी
अधिकारियों ने मौका मुआयना करने व्यवस्थाएं जानी
2 अप्रैल को एस डी एम कनेल जी,  एसडीओपी रोहित लखारे एडिशनल एसपी रावत सा आदि ने मौका मुआयना कर सारी व्यवस्थाओं की जानकारी ली एवं सभी को व्यवस्थाएं संभालने के लिए निर्देश दिए,
2016 के बाद 9 वर्ष बाद बड़ा आयोजन
इसके पूर्व आचार्य  वर्धमान  सागर जी के सानिध्य में दिसंबर 2016 में 43 पीछी के सानिध्य मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ था  जिसमें पहाड़ी मंदिर पर महावीर स्वामी एवं स्वर्ण भद्रादि चार महामुनिराजो की प्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ था। अब पहाड़ी मंदिर पर ही मुनिसुवृत नाथ एवं वर्तमान चौबीसी एवं सहस्त्रकूट जिनालय की 1008 प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होगी क्षेत्र के महामंत्री अशोक झंझरी, हंसमुख गांधी, अतुल कासलीवाल , अरुण धनोते, सुनील जैन, विनोद जैन, गुलाबराव मंडलोई, अरुण जैन, बाबूलाल जैन, आशीष चौधरी, संजय जैन, मनीष दोषी दीपक प्रधान आदि ने अनेक से अधिक संख्या में आकर धर्म लाभ लेने की अपील की
फोटो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।