*नव नियुक्त डीजीपी कैलाश मकवाना ने पदभार ग्रहण

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*भोपाल- आज अलग-अलग विभागों का रिव्यू लिया

प्राथमिकता रहेगी पुलिस फोर्स को और बेहतर प्रोफेशनल और रिस्पांसिबल बनाएं

राज्य शासन की प्राथमिकताएं प्रायोरिटी पर रहेगी

फोर्स से डिसिप्लिन मेंटेन करने की अपेक्षा है

सभी पुलिस अधिकारियों को कानून के मुताबिक काम करने के निर्देश है

आगामी समय में सिंहस्थ 2028 इवेंट बड़ा इवेंट है

सिंहस्थ को लेकर पुलिस का इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग देने का काम करेंगे

सिंहस्थ को लेकर ट्रेनिंग देना मेगा चैलेंजसाइबर अपराधों को लेकर कैसे जनता को अवेयर किया जाए और साइबर thago से कैसे बचाव करना है और अपनी कैपेबिलिटी को बढ़ाना है

उज़ ऑफ़ टेक्नोलॉजी एस्पेक्ट रहेगा

किस तरीके से मूलभूत पुलिस सिंह की जाए और आम जनता को कैसे राहत दी जाए यह प्रयासरहे

अलग-अलग इशु है नारकोटिक्स है
यातायात व्यवस्था को कैसे चालू चलाया जाए या प्राथमिकता है

कर्नाटक में ही हमारे एक आईपीएस एक्सीडेंट हुआ है

यातायात पुलिस कर्मियों को अलग-अलग ट्रेनिंग दी जाएगी

अलग-अलग ब्रांचेस का रिव्यू करूंगा तो मुझे और लगेगा तो बताऊंगा
करप्शन को लेकर स्टैंड पर बोले

मेरी सभी सब सबोर्डिनेट से आशा है कि वह किसी भी के तरीके की गलत कामों में लिप्त ना रहे

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।