पवई । नगर के प्रसिद्ध नाड़ी विशेषज्ञ डॉ जीवन लाल बढोलिया निधन

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

पवई पन्ना । नगर प्रतिष्ठित मिलौनीगंज निवासी नाड़ी विशेषज्ञ डॉ जीवन लाल बढ़ौलिया का  95 वर्ष की आयु में आज रविवार सुबह लगभग 8 बजे निधन हो गया। जानकारी अनुसार उन्होंने लगभग 15 वर्ष शासकीय सेवा के बाद वालेन्ट्री सेवा निवृत्ति लेकर खुद के निवास पर लोगों का इलाज करने लगे। उनको निधन का दुखद समाचार सुनते ही मिलौनीगंज सहित नगर में शोक व्याप्त रहा। डा जीवन लाल नगर सबसे पुराने डाक्टर रहे। समाज सेवा में सबसे आगे रहना,गरीबों की मदद करना सरल स्वभाव के धनी थे। श्री बढ़ोलिया एक बार नगर परिषद में पार्षद भी रह चुके है,इनका अंतिम संस्कार सोमवार को प्रयागराज इलाहाबाद में किया जायेगा। वे अपने पीछे चार बेटे और तीन बेटियों का भरा पूरा परिवार छोड़कर गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।