पार्षद बी डी रजक का अनशन आश्वासन के बाद समाप्त

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बीना. नगर पालिका अधिकारियों द्वारा वार्ड के विकास कार्यों पर ध्यान न देने, सीएमओ की कार्यप्रणाली और पार्षदों से सुझाव लिए बिना ही निर्णय ले लिए जाते हैं, इसके विरोध में निर्दलीय पार्षद बीडी रजक ने सोमवार की दोपहर नगर पालिका के बाद आमरण अनशन शुरू कर दिया था। शाम को सीएमओ ने लिखित आश्वासन दिया और नपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नायब तहसीलदार ने अनशन खत्म कराया।

नानक वार्ड से निर्दलीय पार्षद पूर्व में कई बार ज्ञापन देकर मांगों से अवगत करा चुके हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। परेशान होने के बाद पार्षद ने नपा के गेट पर आमरण अनशन शुरू कर किया था। पार्षद ने बताया कि नगर में सप्ताह में एक दिन की जल सप्लाई बिना पार्षदों के सुझाव से ही बंद कर दी गई, उनके वार्ड सहित अन्य वार्डों में निर्माण कार्यों के लिए टेंडर होने के बाद भी कार्य नहीं कराए जा रहे हैं, सफाई व्यवस्था पर ध्यान न देना, नपा कर्मचारियों की मनमानी और गलत व्यवहार करना, निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद भी सीएमओ की कार्यप्रणाली में सुधार न होने आदि मांगों को लेकर अनशन शुरू किया था। आमरण अनशन की जानकारी मिलने पर सीएमओ ईशांक धाकड़, नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार, उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैंया सहित पार्षद पहुंचे थे और अनशन खत्म करने की बात कही। इस बीच सीएमओ और पार्षद दोनों के बीच तू-तू, मैं-मैं हो गई। शाम को सीएमओ ने लिखित में आश्वासन दिया है कि पंद्रह दिन में मांगों को पूरा किया जाएगा। इसके बाद अनशन खत्म हुआ। विधायक निर्मला सप्रे भी पार्षद के समर्थन में पहुंची थीं और कुछ देर तक कार्यकर्ताओं के साथ धरना स्थल पर रुकी रहीं।

पार्षद के खिलाफ सफाई मित्रों ने सौंपा ज्ञापन

अनशन शुरू होने के बाद सफाई मित्रों ने पार्षद के खिलाफ सीएमओ को ज्ञापन सौंपा, जिसमें सफाई कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया। साथ ही मारपीट करने की धमकी देने का उल्लेख किया, इसको लेकर हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। इस संबंध में पार्षद ने कहा कि सफाई कर्मचारियों ने, जो आरोप लगाए हैं वह निराधार हैं। झूठा षडयंत्र रचकर सीएमओ के दबाव में शिकायत की है। उनके पास एक वीडियो आया था, जिसमें एक सफाई कर्मचारी उन्हें गाली दे रहा है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।