पुलिस महकमे में मनाया गया झण्डा दिवस अनुज सिंह ठाकुर ब्यूरो रिपोर्ट

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ललितपुर। रिजर्व पुलिस लाइन्स में पुलिस झण्डा दिवस के अवसर पर पुलिस अधीक्षक मो.मुश्ताक ने ध्वजारोहण कर, पुलिस ध्वज की गरिमा बनाये रखने हेतु प्रेरित किया। एसपी मो.मुश्ताक ने पुलिस ध्वजारोहण कर उपस्थित समस्त अधिकारी/कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक उ.प्र. द्वारा दिये गये संदेश को अक्षरश: पढ़कर सुनाया गया एवं कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए पुलिस- ध्वज की गरिमा बनाये रखने हेतु प्रेरित किया। इस मौके पर क्षेत्राधिकारीगण एवं अन्य पुलिस अधिकारी /कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इसी क्रम में जनपद के समस्त थानों पर पुलिस झंडा दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण किया गया एवं पुलिस महानिदेशक द्वारा दिये गये संदेश को पढ़कर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए पुलिस- ध्वज की गरिमा बनाये रखने हेतु प्रेरित किया।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।