बीजासन माता मंदिर में ताला तोड़कर नकदी-जेवरात सहित चार लाख की चोरी

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बीना (टीएमई न्यूज)। बीना के खिमलासा में स्थित प्राचीन बीजासन माता मंदिर का ताला तोड़कर बदमाश सोने-चांदी के जेवरात सहित नगदी चुरा ले गए। घटना की जानकारी लगते ही खिमलासा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है। सागर से डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाया गया है। फरियादी उपेंद्र पिता फूलचंद बाथरी (47) ने बताया कि जब वह घर के सामने स्थित प्राचीन बीजासेन माता मंदिर पर पहुंचे, तो मंदिर का ताला टूटा हुआ मिला। मंदिर के गर्भ गृह का भी ताला टूटा हुआ था। इसके बाद जब मंदिर के अंदर जाकर सभी लोगों ने देखा तो सोने के दो मुकुट, बंद गले के तीन हार, सोने के 15 मंगल सूत्र, कान की एक झुमकी, एक मुकुट चांदी का, बिछिया करीब 50, चांदी की पांच पायल, नगदी करीब 40 हजार रूपए सहित कुल करीब 4 लाख रुपए की चोरी की गई है। घटना की जानकारी लगते ही खिमलासा थाना प्रभारी नितिन पाल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जांच पड़ताल करने के बाद सागर से एफएसएल और डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाया गया था। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। खिमलासा थाना प्रभारी नितिन पाल ने बताया कि अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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