बीना। शहर के इतिहास में पहली बार एक साथ 24 तीर्थंकरों के पंचकल्याणक संपन्न होने जा रहे हैं जिसमें चौरासी जिनविंबों के पंचकल्याणक कर प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इन पंचकल्याणक में प्रत्येक तीर्थंकर के माता-पिता एवं सभी पात्र अलग-अलग चयनित किए गए हैं। कुल मिलाकर बीना का यह ऐतिहासिक पंचकल्याणक संपन्न होने जा रहा है। जो 30 जनवरी से 4 फरवरी तक संपन्न होगा। उक्त जानकारी आचार्य विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि सुब्रतसागर महाराज ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान साझा की। मुनिश्री ने कहा कि श्री 1008 श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव जैन शिक्षा केंद्र 3 नंबर स्कूल के पीछे संपन्न होने जा रहे हैं। जिसके प्रचार प्रसार का पुण्य लाभ बीना के पत्रकार बंधुओं को मिलने वाला है। उन्होंने सभी पत्रकारों से कहा कि सभी इस महाआयोजन में सहयोग करें।
पत्रकारों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचती है धर्म भावना –
1008 श्री सहस्त्रफणी पारसनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर छोटी बजरिया बीना के तत्वाधान में होने वाले पंचकल्याणक महा महोत्सव का आयोजन जैन शिक्षा केंद्र तीन नंबर स्कूल में होने जा रहा है जिसकी तैयारियां जोर-जोर से चल रही है जहां एक तरफ पंडाल बनकर तैयार हो गया है वहीं प्रतिष्ठित होने वाले भगवान की व्यवस्थाएं भी लगभग पूर्णता की ओर है एक मंदिर का कार्य भी बहुत शीघ्रता से चल रहा है इसी अवसर पर मुनि श्री सुव्रतसागर जी महाराज के सान्निध्य में अध्यक्ष अशोक वकील एवं महामंत्री अंशुल मिडला के कुशल निर्देशन में पत्रकार वार्ता संपन्न हुई इसमें प्रचार मंत्री पत्रकार राकेश जैन एवं राजेश जैन एवं अन्य पत्रकारों के माध्यम से यह वार्ता बुलाई गई। जिसमें सभी पत्रकारों ने बड़ी प्रसन्नता व्यक्त की एवं अपना सौभाग्य समझते हुए इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कटिबद्ध हुए मुनिश्री ने सभी पत्रकारों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों के कुशल सहयोग के माध्यम से जन-जन तक धर्म की भावना पहुंचती है और यही भावना धर्म का महत्व बताती है इसलिए आप लोगों के बिना सब कार्यक्रम अधूरे रहते हैं पत्रकार बंधुओ के कारण प्रत्येक व्यक्ति को घर बैठे ही धर्म ध्यान करने का अवसर प्राप्त हो जाता है जो बहुत दूर के लोग हैं जो आने में असमर्थ रहते हैं उन्हें भी धर्म ध्यान करने का अवसर प्राप्त हो जाता है।
घर-घर तक पहुंचता है धर्म ध्यान
पत्रकार एक ऐसे साधन है जो घर-घर तक पहुंच कर लोगों को धर्म ध्यान करने में सहयोग करते हैं यह वह अवसर होते हैं जो जीवन में बहुत कम प्राप्त होते हैं मुनिश्री ने पत्रकारों को बताया कि जैन धर्म का सबसे बड़ा महोत्सव पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होता है यह महोत्सव बहुत सौभाग्य से बहुत प्रतिष्ठा के बाद प्राप्त होता है लेकिन पूरी बिना दिगंबर जैन समाज और सभी समाजों के सहयोग से यह मंदिर अति शीघ्र समय में बनकर तैयार हुआ साथ-साथ में शीघ्रता से सभी तैयारियां होकर इसको मूर्त रूप प्रदान होने वाला है।
पंचकल्याणक जैन धर्म की सबसे बड़ी प्रभावना होती है
जैन धर्म के पूरे अनुष्ठानों में पूरे कार्यक्रमों में पंचकल्याणक सर्वोपरि होते हैं इसे बड़ा महत्व कुछ नहीं होता है। कल्याणक महोत्सव में जहां एक तरफ संपूर्ण जैन समुदाय भक्ति में डूबा होता है वहीं अन्य तरफ पाषाण को परमात्मा बनाने की प्रक्रिया यहां पर संपादित की जाती है पाषाण से परमात्मा कैसे बनाए जाते हैं इसी की विधि को पंचकल्याणक कहते हैं। विशेष जानकारी के लिए आपको समय-समय पर कार्यक्रम प्रेषित करते जाएंगे ऐसा मुनि श्री ने सभी को आश्वासन दिया मुनि श्री का मानना है कि यह पंचकल्याणक बीना के इतिहास में अद्वितीय कीर्तिमान स्थापित करेगा। मुनिश्री ने छोटी बजरिया पहुंचकर मंदिर निर्माण की रूपरेखा अच्छी और आवश्यक निर्देश भी दिए और साथ-साथ में तीन नंबर स्कूल पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारी अच्छी और आवश्यक निर्देश भी दिए।


