बीना विधानसभा के विकास को लेकर विधायक निर्मला सप्रे ने की बीपीसीएल के डायरेक्टर से चर्चा…

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क्षेत्र के बेरोजगारों की समस्याओं से कराया अवगत
, कहा विवेकानंद हॉस्पिटल में मिले एम्स जैसी सुविधाएं..
बीना / विधायक निर्मला सप्रे ने बीते दिवस बीपीसीएल के सीएमडी संजय खन्ना से एक विशेष मुलाकात की । इस मुलाकात के दौरान उन्होंने विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के निराकरण एवं विभिन्न मांगों को लेकर दो अलग-अलग पत्र भी सौंपे। जिन पर सीएमडी खन्ना ने अपनी सहमति जताई और विधायक को आश्वत किया कि जल्द ही इन पर गौर करके इन समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
            इस औपचारिक बैठक में विधायक ने सीएमडी बीपीसीएल से भेंटकर ज्ञापन सौंपे, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ,रोजगार, खेल जैसी जन सुविधाये बढाने की मांग रखी। उन्होंने रिफाइनरी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर पारदर्शिता बरतने की मांग की। आये दिन टेंडर,व मजदूरो की मजदूरी भुगतान में अनियमितताये बरतने की आ रही शिकायतें एवं रिफायनरी से उत्सर्जित गैसों से किसानो की फसल प्रभावित का मुद्दा उठाया। विधायक ने प्रबंधन पर सवाल उठाए एवं क्षेत्रीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की बात भी कही उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी जमीनों का उचित मुआवजा दिया जाए और नए प्रोजेक्ट में जो अवैध उत्खनन किया जा रहा है उसे पर रोक लगाई जाए विधायक ने सर की राशि के दुरुपयोग का मामला भी उठाया।
           उन्होंने उत्खनन में रॉयल्टी चोरी से सागर जिला को राजस्व हानि रोकने तत्काल कदम उठाने की मांग की।

सी एस आर से क्षेत्रीय विकास के लिए उठाई मांग
      विधायक निर्मला सप्रे ने बीते वर्षों में बीपीसीएल की सी एस आर मद का उपयोग क्षेत्रीय विकास हेतु उचित रूप से नहीं किए जाने की बात कहते हुए कहा कि चिन्हित एनजीओ द्वारा विकास की राशि का दोहन किया जा रहा है ।
सी एस आर के तहत जो काम बीना विधानसभा क्षेत्र में होना चाहिए उन्हें बीपीसीएल प्रमुखता के साथ कराए उन्होंने कहा कि बीना की जो पुरानी शासकीय 2 नंबर स्कूल है उसके भवन का निर्माण बीपीसीएल द्वारा कराया जाए। इसके साथ ही बीना विधानसभा क्षेत्र के लिए 30 चलित शौचालय की मांग भी उन्होंने की जिस पर सीएमडी खन्ना ने अपनी सहमति भी दर्शाई। इसके अलावा विधायक ने रिफाइनरी प्रबंधन की कार्यप्रणाली में सुधार कर ग्रामीणों व आम जनता के हितों में काम करने की बात कही। विधायक ने कहा कि पेट्रोकेमिकल कोर्स बीना में बीपीसीएल द्वारा शुरू कराया जाए , इसके अलावा आईटीआई के छात्रों को रिफाइनरी में निशुल्क विजिट कराया जाए जिससे भी रोजगार की ओर रुझान बढ़ सके, बीना की विवेकानंद अस्पताल के विषय में उन्होंने कहा कि इस अस्पताल का दायरा बढ़ाया जाए एवं एम्स जैसी सुविधाएं अस्पताल में दी जाएं ताकि बिना विधानसभा क्षेत्र की जनता को भोपाल और अन्य बड़े शहरों की ओर चिकित्सा के लिए न जाना पड़े।
         विधायक ने बीपीसीएल के डायरेक्टर को जानकारी देते हुए कहा कि कुछ नए प्रोजेक्ट आए हैं जिसे गांव का आवागमन अवरोध हो गया है उसका निराकरण कराया जाए इसके अलावा क्षेत्रीय प्रदूषण पर भी उनकी गहन चर्चा हुई जिस पर उन्होंने प्रदूषण यंत्रों से जांच करने की बात कही उन्होंने कहा कि रिफाइनरी मजदूरों को फ्रेंडली वातावरण दिया जाए ताकि मजदूर जो आए दिन अपनी मांगों को लेकर विधायक के पास आते हैं उनकी समस्याओं का निराकरण हो सके।
         बैठक में बीपीसीएल के सीएमडी ने अधिकांश मांगों पर अपनी सहमति जाहिर की और उन्होंने विधायक को आश्वस्त किया कि बीना क्षेत्र के विकास से संबंधित हर प्रकार की मदद बीना को दी जाएगी।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।