बीना स्टेशन पर ओएसओपी आउटलेट पर लगा शहर में निर्मित नमकीन उत्पादों का स्टॉल, जन औषधि केंद्र का भी हुआ लोकार्पण

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बीना रेलवे स्टेशन पर 12.5 लाख रुपए की लागत से प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र व एक स्टेशन-एक उत्पाद का वर्चुअल लोकार्पण किया। वर्तमान में बीना स्टेशन पर क्षेत्रीय नमकीन उत्पादों का आउटलेट विज्ञापन के लिए लगाया गया है। असल में रेलवे स्टेशनों के माध्यम से सरकार क्षेत्रीय उत्पादों का प्रमोशन करने एक स्टेशन एक उत्पाद की स्कीम लाई है। इसमें एक हजार रुपये शुल्क जमा करके 15 दिन के लिए आउटलेट पर अपने उत्पादों को रखकर बेच भी सकते हैं।

वर्तमान में बीना स्टेशन पर स्थानीय नमकीन का आउटलेट लगा हुआ है। हालांकि यह पहले से संचालित हो रहा था। इसके अलावा जन औषधि केंद्र भी शुरू होगा। देखा जाता है कि सफर के दौरान अक्सर यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती हैं। जिसके चलते यात्रियों को दवा लेने तक का समय नहीं मिल पाता क्योंकि ट्रेनों का स्टॉपेज सीमित समय के लिए होता है। वहीं स्टेशन से बाहर निकलकर बाजार में केमिस्ट से दवा लेने में अत्यधिक समय लग जाता है। इसलिए स्टेशन पर ही दवा खरीदने की सुविधा मिल जाने से लोगों को दवा उपलब्ध हो सकी। इसमें ध्यान रखा गया है कि यहां मिलने वाली दवाएं जेनरिक होंगी,जिससे यह बाजार के मुकाबले सस्ती होंगीं।

बच्चों ने दीं प्रस्तुतियां, जनप्रतिनिधियों ने किया संबोधित- रेलवे जंक्शन पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने नृत्य की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया और विधायक निर्मला सप्रे ने लोगों को संबोधित किया। इसमें रेलवे अधिकारियों और स्टाफ ने शामिल होकर प्रधानमंत्री का भाषण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुना।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।