बीना ।वरिष्ठ पत्रकार बबेले की पुत्री का जन्मदिन मनाया किन्नर परिवार ने दुआएं देकर गिफ्ट भी दी किन्नरों ने

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बीना ।स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार राजेश बबेले की सुपुत्री का खुशी बबेले के जन्म दिवस पर बबेले के समाचारों से प्रभावित रहने वाले स्थानीय किन्नर परिवार द्वारा उनके निवास पर आकर बिटिया का जन्मदिन बनवाया एवं केक कटवाया ।
इस अवसर पर जन्मदिन की खुशियों में बधाई गीत गाते हुए बिटिया को गिफ्ट प्रदान किए ।राजेश बबेले की सुपुत्री रेणुका (खुशी) बबेले के जन्म दिवस पर चार चांद उस समय लग गए जब अचानक से अर्धनारीश्वर का रूप माने जाने वाले किन्नर परिवार ने अचानक आकर केक कटवा कर बिटिया का जन्म दिवस बड़े धूमधाम हर्ष उल्लास से मनवाया।
साथ ही भजन एवं बधाई गीत गाकर एवं नृत्य कर बिटिवीया के जन्म दिवस पर खुशी का माहौल बनाकर आशीर्वाद स्वरुप सभी किन्नर बहनों ने बिटिया को एवं परिवार को अपना शुभ आशीर्वाद प्रदान किया।
इसके पूर्व पत्रकार बबेले परिवार सहित अपनी बिटिया और उसकी सभी सहेलियों को लेकर सिद्ध धाम श्री कटरा मंदिर पहुंचे जहां से कटरा सरकार की पूजा अर्चना का आशीर्वाद लिया

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।