बीना । 30 अप्रेल तक 60 प्रतिशत कार्य पूरा नहीं हुआ तो भुगतान रोक दिया जाएगा पीएचई और जल निगम की बैठक में विधायक निर्मला सप्रे ने दी हिदायत

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बीना (राजेश जैन)। विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर और खासतौर पर पानी से संबंधित कामों में लापरवाही व कोताही बर्दाश्त न करने के निर्देश पीएचई एवं जल निगम के अधिकारियों को विधायक निर्मला सप्रे द्वारा दिए गए हैं। एसडीएम कार्यालय के सभागृह में पीएचई एवं जल निगम विभाग के अधिकारियों के साथ एक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में विभागों द्वारा अमृत योजना 2.0 के तहत पाइप लाइन बिछाने में देरी, पाइप लाइन गहरी न बिछाकर कम गहराई पर बिछाने, गुणवत्तायुक्त मटेरियल का उपयोग न किए जाने एवं पाइप लाइन बिछाने के दौरान खोदी हुई सडक़ों को पुन: सीसी से न भरे जाने आदि लापरवाहियों के संदर्भ में विधायक निर्मला सप्रे ने इन विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से हिदायत देते हुए कहा है कि वे कार्य में तेजी लाएं और गुणवत्ता के साथ कार्य करें। ताकि क्षेत्र की जनता को शीघ्रातिशीघ्र योजनाओं का लाभ मिल सके। विधायक ने कहा कि यदि 30 अप्रेल तक 60 प्रतिशत या इससे अधिक कार्य नहीं हुआ तो संबंधित ठेकेदारों के बिल और भुगतान रोक दिए जाएंगे। बैठक में एसडीएम विजय डेहरिया ने भी दोनों विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देश देते हुए कहा कि कार्य जल्द से जल्द और गुणवत्ता के साथ पूरा करें। इस अवसर पर विधायक और एसडीएम ने कहा कि पीएचई और जल निगम के कार्यों का निरीक्षण वे स्वयं करेंगे और यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में पीएचई एसडीओ राहुल आरमो, महेन्द्र शिल्पकार एवं जल निगम से इंजीनियर जावेद खान व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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