ललितपुर/जुमे की नमाज व परिनिर्वाण दिवस पर चौकस रही सुरक्षा व्यवस्था

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

ललितपुर। पुलिस अधीक्षक मो.मुश्ताक द्वारा जुमे की नमाज व महापरिनिर्वाण दिवस के दृष्टिगत थाना कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत शहर क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेकर सुरक्षा व्यवस्था ड्यूटी में तैनात पुलिस बल को चेक कर सभी को ड्यूटी के दौरान दंगा नियन्त्रण उपकरणों को धारण करने के आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में जुमे की नमाज के दृष्टिगत जनपद के समस्त थाना क्षेत्रन्तर्गत मस्जिदों पर सुरक्षा व्यवस्था हेतु पुलिस बल की ड्यूटी लगाई गई तथा समस्त क्षेत्राधिकारी, प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष एवं चौकी प्रभारियों द्वारा मय पुलिस बल के अपने-अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहते हुए जुमे की नमाज को सकुशल सम्पन्न कराया गया। एसपी द्वारा सभी को अपने-अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहने के निर्देश दिये गये। जुमे की नमाज के दृष्टिगत थाना कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत सम्पूर्ण शहर क्षेत्र में पैदल गश्त किया गया। जनपद के महत्वपूर्ण स्थानों पर क्यूआरटी टीमों को लगाकर तथा अलग अलग थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा लगातार भ्रमणशील रहकर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गयी। स्थानीय अभिसूचना ईकाई ललितपुर सहित अतिरिक्त पुलिस बल की सादे कपडों में डयूटियां लगाई गयी है जो कि सभी गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि रखें हुये है। मिश्रित आवादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों से निगरानी करायी जा रही है। ललितपुर पुलिस द्वारा सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्मों पर 24/7 राउण्ड द क्लॉक सतर्क निगरानी रखी जा रही है।
अनुज सिंह ठाकुर ब्यूरो रिपोर्ट ललितपुर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।