गौरझामर। इक्कीसवीं सदी मे भी यदि मनमाना किराया अदा करने के बाद भी आरटीओ की कृपा से लोगो को कपडे फटाऊ व कर्कश कान फोडू आवाज करने वाली जर्जर हाल जानलेवा खटारा व एक्सपायर सार्वजनिक यात्री बसो मे निजिकरण के वावजूद राज्य परिवहन जैसी और उनसे भी दयनीय हाल बसो मे सफर करना पडे तो भृष्टाचार और अनियमितताओ की तो हद ही हो गई, बतादे की विकल्प के अभाव मे यात्रियो की खटारा बसो मे सफर करना मजबूरी बन गया है रेल लाइन नही होने से लोग बसो मे मंहगी यात्रा करने के साथ साथ यहां के रोडो पर दौड रही नई बसो के स्थान पर चलने वाली खटारा बसो मे सफर करना मजबूरी है इस सम्बन्ध मे शासन प्रशासन आरटीओ व पुलिस का ध्यान विभिन्न माध्यमो से नागरिको ,यात्रियो व्दारा कई आकर्षित कराया गया ,लेकिन जबाबदारो व्दारा अपने कर्तव्य परायणतानुसार इस ओर ध्यान नही देने से पानी सिर से ऊपर निकल गया है खटारा बसो मे यात्री जानहथेली पर रखकर भगवान भरोसे बैठते है इन चल रही खटारा बसो पर कोई भी कठोर कार्यवाही नही होने से यह धडल्ले से बेखौफ दौर रही है और इनके दुष्परिणाम यात्रियो को भुगतना पड रहे है इक्कीसवी सदी मे तो कम से कम यात्रियो को आरामदेह व सुविधाजनक नई बसो का तो आंनद तो मिलना चाहिये आरटीओ इस ओर ध्यान दे व ऐसे खटारा टाइमिगो का स्वयं औचक निरीक्षण करे जिससे खटारा बसो की पोल खुल सके और जगहजगह बिगडने ,व यात्रियो से धक्का लगवाने वाली ऐसी बसो से छुटकारा मिल सके।

