विकल्प के अभाव मे मजबूरी बना यात्रियो को खटारा बसो मे सफर

👇खबर सुनने के लिए प्ले बटन दबाएं

गौरझामर। इक्कीसवीं सदी मे भी यदि मनमाना किराया अदा करने के बाद भी आरटीओ की कृपा से लोगो को कपडे फटाऊ व कर्कश कान फोडू आवाज करने वाली जर्जर हाल जानलेवा खटारा व एक्सपायर सार्वजनिक यात्री बसो मे निजिकरण के वावजूद राज्य परिवहन जैसी और उनसे भी दयनीय हाल बसो मे सफर करना पडे तो भृष्टाचार और अनियमितताओ की तो हद ही हो गई, बतादे की विकल्प के अभाव मे यात्रियो  की खटारा बसो मे सफर करना मजबूरी बन गया है रेल लाइन नही होने से लोग बसो मे मंहगी यात्रा करने के साथ साथ यहां के रोडो पर दौड रही नई बसो के स्थान  पर चलने वाली खटारा बसो मे सफर करना मजबूरी है इस सम्बन्ध मे शासन प्रशासन आरटीओ व पुलिस का ध्यान विभिन्न माध्यमो से नागरिको ,यात्रियो व्दारा कई आकर्षित कराया गया ,लेकिन जबाबदारो व्दारा अपने कर्तव्य परायणतानुसार इस ओर ध्यान नही देने से पानी सिर से ऊपर निकल गया है खटारा बसो मे यात्री जानहथेली पर रखकर भगवान भरोसे  बैठते है इन चल रही खटारा बसो पर कोई भी कठोर कार्यवाही नही होने से यह धडल्ले से बेखौफ दौर रही है और इनके दुष्परिणाम यात्रियो को भुगतना पड रहे है इक्कीसवी सदी मे तो कम से कम यात्रियो को आरामदेह व सुविधाजनक नई बसो का तो आंनद तो मिलना चाहिये आरटीओ इस ओर ध्यान दे व ऐसे खटारा टाइमिगो का स्वयं औचक निरीक्षण करे जिससे खटारा बसो की पोल खुल सके और जगहजगह बिगडने ,व यात्रियो से धक्का लगवाने वाली ऐसी बसो से छुटकारा मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Ad
What is the capital city of France?

Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।