विकास और जनकल्याण प्रदेश सरकार का ध्येय है
टुडे एम पी एक्सप्रेस दिलीप महेश्वरी

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शाजापुर। कालापीपल विकास और जनकल्याण प्रदेश सरकार का ध्येय है। मध्यप्रदेश सरकार निरंतर ऐसे कार्यों को आगे बढ़ा रही है, जो प्रदेश की प्रगति और जनहित को सर्वोपरि रखते है। यह बात प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार  ने आज रणोगंज स्थित परमार समाज धर्मशाला में सम्पन्न हुए सड़कों के भूमि पूजन कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में  शुजालपुर अकोदिया मार्ग से रिछोदाखेड़ा मार्ग लम्बाई 5.50 किमी. एवं राणोगंज  से राणोगंज छतरी मार्ग लम्बाई 0.45 किमी. सड़क निर्माण कार्य का भूमिपूजन हुआ।
    इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  हेमराज सिंह सिसोदिया,भाजपा जिला अध्यक्ष  अशोक  नायक,रामचंदर पाटोंदिया,  विजय सिंह बैस, जेपी परमार, नरेंद्र यादव,देवेंद्र तिवारी,  सूरज सिंह सिसोदिया,  परसराम धनगर, जगदीश फौजी जिला पंचायत सदस्य,  बलवीर सिंह राजपूत सरपंच रिछोदा सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।