विधानसभा में मामला उठने के बाद भी नहीं हो रही अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाईएनजीटी के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन : मशीनों से निकाली जा रही रेत : नदियों के जीव-जंतु खतरे में

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सागर जिले का खनिज विभाग सिर्फ मशीनों पर करता है कार्रवाई : रेत माफिया नेताओं की गोद में छिपे रहते हैं
बीना (राजेश जैन)। लगभग 10 दिन पूर्व मप्र विधानसभा में अवैध खनन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। जिसके प्रमुख समाचार पत्रों में फ्रंट पेज पर खबरें भी प्रकाशित की गई थीं। इन खबरों में स्पष्ट लिखा गया था कि प्रदेश में खनन माफिया बेखौफ है वह न सरकार की सुन रहा है और न प्रशासन की। यहां तक कि माफिया कार्रवाई करने पहुंचने वाले अफसरों कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी देने से भी नहीं चूकता और कई अधिकारी कर्मचारियों की खनन माफियाओं ने हत्या भी कर दी है। ऐसे में जब प्रदेश की सरकार ही अवैध उत्खनन को लेकर कठघरे में खड़ी हो तो उसे सागर जिले के सबसे संवेदनशील क्षेत्र बीना में भी अवैध उत्खनन को बंद कराना चाहिए। क्योंकि सरकार जिस पार्टी की है उसी पार्टी के अधिकांश लोग अवैध उत्खनन में संलिप्त हैं।


नदियों के जीव जंतु लगातार खनन से हो रहे हैं खत्म –
गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून एनजीटी को पर्यावरण के दृष्टिकोण से अवैध रेत उत्खनन को रोकने के लिए सिविल कोर्ट संहिता के अधिकार दिए गए हैं जिनका यदि एनजीटी अधिकारी प्रयोग करें तो अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाई जा सकती है किंतु एनजीटी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रेत माफिया मशीनों से बेतवा और बीना नदी के लखाहर और ऐरन घाट से लगातार रेत निकालने में संलिप्त हैं जबकि ये घाट खनिज विभाग के अनुसार सर्वे नंबर में भी नहीं आते हैं। एनजीटी का उद्देश्य है कि नदियों के जल के साथ उसमें पनप रहे जीव जंतु भी सुरक्षित रहें किंतु 30-40 मीटर से ज्यादा पाइप डालकर रेत निकालने के कारण जीव जंतु भी लगातार खत्म हो रहे हैं और जब लोगों के घरों पर ट्रालियों में बजरी पहुंचती हैं तो उसमें भी मरी हुई मछलियां पाई जाती हैं।
नेताओं और अधिकारियों का है खुला संरक्षण –
उल्लेखनीय है कि सागर जिले का खनिज विभाग जो भी कार्रवाई करता है वह सिर्फ मशीनों पर करता है जबकि असली रेत माफिया नेताओं के कुर्तों की जेब में छुप जाते हैं। इतिहास गवाह है कि खनिज अधिकारियों ने जब भी अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई की है कोई भी उत्खननकर्ता के नाम पर आज तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। खनन माफिया अपनी मशीनों को छोडक़र भाग जाते हैं और बाद में उनके आका राजनैतिक पहुंच के चलते इन मशीनों को थोड़ा सा जुर्माना भरवाकर छुड़ा लेते हैं। हालाकि रेत खनन के लिए वैध रूप से ठेकेदार को लाइसेंस भी दिए गए है किंतु इसके बाद भी नदी के दूसरे किनारों और घाटों से लगातार खनन जारी है।
एनजीटी का दावा जल्द ही होगी बड़ी कार्रवाई –
एनजीटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समय जगत को बताया कि पूर्व में खनिज विभाग को जानकारी दिए बिना एनजीटी द्वारा एक कार्रवाई की गई थी जिसमें कुछ वोटें जला दी गईं थी और मशीनों को जब्त किया गया था किंतु क्षेत्र में अवैध उत्खनन लगातार जारी होने की खबरें मिल रही हैं इसलिए जल्द ही बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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