शाजापुर ।दिव्यांगजनों एवं वृद्धजनोंहेतु एडिप/वयोश्री योजनांतर्गत उपकरण चिन्हांकन शिविर का आयोजन किया गया.

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शाजापुर- दिनांक 5 फरवरी को शाजापुर जिले की जनपद पंचायत मोहन बड़ोदिया मे शाजापुर कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना के निर्देशानुसार भारत सरकार की एडिप एवं राष्ट्रीय वयोश्री योजना के अंतर्गत जनपद पंचायत मोहन बड़ोदिया में दिव्यांग परिक्षण शिविर आयोजित किया गया. जिसमें कुल पंजीयन 243 किये गये, जिसमे 84 हितग्राहियों का यू डी.आई कार्ड के लिये चिन्हांकन किया गया. 75 हितग्राहीयों को 202 सहायक उपकरण चिन्हित किये गये जिनमें मोटराइज्ड के लिए 14,ट्राइसिकल के 17, व्हीलचेयर के 18,कान की मशीन के 19,कृत्रिम अंग 18, वॉकिंग स्टिंग के 11,बैसाखी 44, रोलेटर 12,बेल्ट 41, टीएलए मकिट 8 है । 
शिविर में एलिम्को टीम उज्जैन व जिला चिकित्सालय के चिकित्सको द्वारा दिव्यांगजनों व वृद्धजनों का उपकरण चिन्हांकन किया गया जिसमें अनुविभागीय अधिकारी मनीषा वास्कले, मोहन बड़ोदिया जनपद पंचायत सीईओ अमृतराज सिसोदिया, तहसीलदार सुनील पाटिल, नायब तहसीलदार के.एल. चौहान, पीसीओ रामलाल रावल,मुरलीधर भालौट सहित जनपद के समस्त कर्मचारी और पंचायत सचिव, सहायक सचिव व जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्र शाजापुर से प्रशासनिक अधिकारी मुकेश कुशवाह, विशेष शिक्षक उमेश पालीवाल. एमआरडब्ल्यू राजेश मालवीय, साइक्लोजिस्ट दिपेश राखोलिया, फिजियोथैरेपिस्ट रेखा सोनी व अन्य अधिकारी, कर्मचारीयों द्वारा शिविर में उपस्थित होकर विशेष सहयोग दिया गया, शिविर में जनप्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत सदस्य लोकेंद्र सिंह सोलंकी, जिला पंचायत सदस्य जगदीश चौधरी,जिला पंचायत सदस्य जगदीश फौजी, जनपद सदस्य महेश हाड़ा,जनपद सदस्य गोपाल राठौर भी मौजूद रहे.महेश जैन -मोहन बड़ोदिया

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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