सागर /क्षत्रिय समाज की जिला कोर कमेटी की बैठक संपन्न पूर्व में की गई क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष की नियुक्ति शून्य घोषित

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सागर/ विगत दिनों जिले के कतिपय राजनैतिक परिवार द्वारा दाल वाटी के नाम पर क्षत्रिय समाज के कुछ लोगों को एक निजी होटल में आमंत्रित किया गया और आनन फानन में राजनैतिक परिवार ने अपने भतीजे के नाम पर उपस्थित क्षत्रिय समाज के सामने एक लाईन का प्रस्ताव लेकर अध्यक्ष का नाम घोषित कर दिया जिससे सागर जिले के संपूर्ण क्षत्रिय समाज में असंतोष का वातावरण बना है। क्षत्रिय समाज के लोगों का कहना है कि ना तो नियुक्ति में समाज के वरिष्ठ लोगों को आमंत्रित किया गया और ना ही बैठक में आये लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिया गया। ऐसी क्या मजबूरी बनी थी कि दाल वाटी के नाम पर क्षत्रिय समाज के लोगों को बुलाकर एक लाईन का प्रस्ताव लाकर अपने ही भतीजे को अध्यक्ष घोषित करा दिया। जिले के वरिष्ठ क्षत्रिय समाज के लोगों ने रविवार को तहसील स्थित जिला पंचायत अध्यक्ष के निवास पर एक बैठक की जिसकी अध्यक्षता क्षत्रिय समाज के जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्णा सिंह महुआखेड़ा द्वारा की गई थी। बैठक में क्षत्रिय समाज के वर्तमान अध्यक्ष हरिराम सिंह कैथोरा भी उपस्थित रहे। बैठक में विगत दिनों हुए एक तरफा अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। लोगों का कहना था कि बिना वर्तमान अध्यक्ष और निर्वाचन अधिकारी की सहमति व जानकारी लिए यह घोषणा पूर्णतः अवैधानिक है। विस्तार से चर्चा करने के बाद उपस्थित कोर कमेटी सदस्यों द्वारा निर्णय लिया गया कि शीघ्र ही जिले के क्षत्रिय समाज का एक महाअधिवेशन आयोजित किया जावेगा। जिसमें अध्यक्ष पद हेतु सभी को मौका दिया जावेगा तथा समन्वय अथवा निर्वाचन से एक नाम की घोषणा ही जावेगी। यह भी निर्णय लिया गया कि क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष का पद किसी बड़े राजनैतिक परिवार से ना हो क्योंकि बड़े राजनैतिक परिवार समाज का उपयोग अपने निजी हित में करते हैं। विगत कई वर्षों का अनुभव है कि बडे राजनैतिक परिवारों द्वारा कोई ऐसा कार्य नहीं किया गया जो समाज के हित में रहा हो। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष का चुनाव संपन्न नहीं हो जाता है। तब तक कोई भी नियुक्ति ना की जावे यदि कोई नियुक्ति की जाती है अथवा संगठन की गतिविध जारी रखी जाती है तो वो अवैध मानी जावेगी साथ ही यह निर्णय लिया गया कि जब तक क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष का निर्णय नहीं होता है तब तक वर्तमान अध्यक्ष हरिराम सिंह कैथोरा कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहेंगे। बैठक में प्रमुख रूप से राजेन्द्र सिंह मोकलपुर, एड. अनिल सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य नर्वदा सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत, पूर्व जिला पंचायत सदसय अवध किशोर बेरखेरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष गोविंद सिंह मालथौन, शिवराज सिंह छापरी, अमर सिंह डाबरी, डी.एस.मासाब देवरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह, धीरज सिंह औरिया, देवेन्द्र सिंह उपाध्यक्ष जिला पंचायत, साहब सिंह सेमरा, सरवन सिंह मिडवासा, राजकुमार सिंह बरकोटी, मंगल सिंह बंडा, हरनाम सिंह सागौनी, सत्यजीत सिंह बीना, एड. कल्याण सिंह रम्पुरा, भूपेन्द्र सिंह सिगदौनी, अभिजीत सिंह (गोल्डी) उदयपुरा, पप्पू गौर रहली, सीताराम सिंह बड़गान, हैमेश सिंह टीला, देवेन्द्र सिंह अटारी, भरत सिंह भापेल, अशोक सिंह सेवन, अभय प्रताप सिंह पथरिया, इंद्राज सिंह ढ़करई, इंद्राज सिहं खुरईथावरी, बृजेन्द्र सिंह बिलहरा सहित आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।