सागर ।मोतीनगर थाने में लगाया गया सीएम हेल्पलाइन शिकायतो के निराकरण लिए विशेष शिविर, सीएसपी ललित कश्यप और थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने शिकायतों का निराकरण कराया

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सागर ।पुलिस अधीक्षक सागर श्री विकाश कुमार शाहवाल के आदेश पर नगर पुलिस अधीक्षक सागर श्री ललित कश्यप एवं थाना प्रभारी मोतीनगर द्वारा सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण हेतु आज दिनांक 17/02/24 को थाना मोती नगर परिसर में विशेष शिविर लगाकर शिकायत कर्ताओं  को  शिविर में बुलाकर  स्वयं सुना  एवं तत्काल निराकरण हेतु संबंधितों को निर्देशित किया शिविर में कई शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया थाना प्रभारी मोती नगर श्री जसवंत सिंह ने बताया कि इस तरह के शिविर लगातार लगाकर शिकायत करताओ की समस्याओं का त्वरित निराकरण थाना मोतीनगर द्वारा लगातार  किया जाता रहेगा आज के शिविर में कुल 52 शिकायत कर्ताओं द्वारा स्वयं उपस्थित होकर अपनी समस्याओं को पुलिस अधिकारियो के समक्ष रखा पुलिस अधिकारियों द्वारा सभी की समस्याओं के निराकारण हेतु आश्वस्त किया गया

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।

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