

सोनकच्छ। स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम लगाने के सरकारी दावों की पोल उस समय खुलती नजर आती है, जब ऐसे फर्जी डॉक्टर खुलेआम अपना क्लीनिक चला रहे होते हैं और जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। ऐसा ही मामला चौबारा जागीर में देखने को मिल रहा है, जहां जयंत विश्वास नामक डॉक्टर पिछले 20 वर्षों से बिना मान्यता प्राप्त डिग्री और बिना मेडिकल बोर्ड के प्रमाण पत्र के अपना क्लीनिक चला रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने इस अवैध क्लीनिक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इस संबंध में जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. शैलेंद्र ओरिया से सवाल किया गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। उनका यह रवैया स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
*फर्जी डॉक्टर का खेल: मरीजों की जान से खिलवाड़*
जयंत विश्वास का यह अवैध क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। बिना किसी अधिकृत मेडिकल डिग्री और बिना MP काउंसलिंग मेडिकल बोर्ड के सर्टिफिकेट के, जयंत विश्वास सालों से मरीजों का इलाज कर रहा है। ऐसे झोलाछाप डॉक्टर अक्सर गलत इलाज और अनावश्यक दवाइयों के माध्यम से मरीजों की जान खतरे में डाल देते हैं। इसके बावजूद प्रशासन की आंखें मूंदे रहना यह साबित करता है कि या तो वे इस गड़बड़ी से अनजान हैं या फिर किसी मिलीभगत के चलते जानबूझकर इस मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं।
*BMO की चुप्पी: क्या प्रशासन की मिलीभगत?*
इस मामले में जब हमारे संवाददाता ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. शैलेंद्र ओरिया से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। पत्रकारों से किनारा करते हुए उनका बचाव करना इस बात की ओर इशारा करता है कि कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस गड़बड़ी में शामिल हैं या फिर जानबूझकर इसे अनदेखा कर रहे हैं। जब यह मामला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें इस विषय की कोई जानकारी नहीं थी। CMHO ने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही मामले की जांच कराएंगी और यदि फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, तो जयंत विश्वास के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह उठता है कि यदि CMHO निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करवाती हैं तो क्या BMO और अन्य स्वास्थ्य अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे?
*जनता में आक्रोश, प्रशासन पर उठे सवाल*
चौबारा जागीर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में जयंत विश्वास के खिलाफ कार्रवाई न होने से जनता में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर कोई गरीब या असहाय व्यक्ति इस झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से अपनी जान गंवा देता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही ने पूरे सोनकच्छ क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।मरीजों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को तत्काल सख्त कदम उठाने होंगे। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि जयंत विश्वास के अवैध क्लीनिक को तुरंत सील कर, उसकी डिग्री और मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच करे। इसके अलावा, इस पूरे मामले में BMO डॉ. शैलेंद्र ओरिया की भूमिका की भी गहराई से जांच की जानी चाहिए।
*सरकार और प्रशासन कब जागेगा?*
झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ राज्य और केंद्र सरकारें बार-बार कार्रवाई के निर्देश जारी करती हैं, लेकिन नीचे स्तर के अधिकारी इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। यदि समय रहते ऐसे फर्जी डॉक्टरों पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह न केवल मरीजों की जान को जोखिम में डालेगा, बल्कि सरकार की स्वास्थ्य नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि CMHO और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और कब तक दोषियों पर कार्रवाई होती है। अगर जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो जनता को मजबूर होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी को जनता अब और बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
*BMO डॉ शैलेंद्र ओरिया द्वारा किया जा रहा गुमराह*
वही आज दिनांक 14 फरवरी को जब बीएमओ शैलेंद्र ओरिया से संवाददाता से बात 11.15 मिनिट पर की गई तो उन्होंने कहा कि मैं कुछ देर बाद जाऊंगा कार्यवाही करने तत्पश्चात दोबारा 6 बजे संवाददाता से बात की गई तो डॉ शैलेंद्र ओरिया ने कहा मैंने मौखिक प्रतिवेदन लिया है फोटो वगैरा कुछ भी नहीं खींचा। जब की कोई भी अधिकारी कहीं जांच करने जाता है तो लिखित में प्रतिवेदन लेता है और सामने वाले को कॉपी देता है लेकिन हमारे BMO डॉ शैलेंद्र ओरिया अपना ही कानून चला कर बखान कर रहे हैं।
*फरियादी सीताराम बामनिया को भी किया गुमराह*
वही फरियादी सीताराम बामनिया द्वारा बीएमओ डॉ शैलेंद्र ओरिया से पूछना चाह की सर अभी तक आपने कोई कार्यवाही की या नहीं तो डॉ. शैलेंद्र ओरिया ने जवाब दिया कि मैं सुबह 11:00 बजे जाऊंगा यह सब देखकर ऐसा लगता है जैसे की बीएमओ डॉ. शैलेंद्र ओरिया भी कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार में लिफ्ट नजर आ रहे हैं। इसलिए ऐसे अधिकारियों पर शक्त से सख्त कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाना चाहिए। नहीं तो ऐसे में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ हो सकता है अब देखना यह है जिला प्रशासन और सम्बन्धित अधिकारी इसमें क्या कार्रवाई करते हैं।

