कालापीपल /आरोग्यम उप-स्वास्थ्य केंद्र, विधायक ने किया भूमि-पूजन

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शाजापुर। कालापीपल विधानसभा के ग्राम बेहरावल आयुर्वेदिक पद्धति से बेहतर उपचार की सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आयुष अस्पतालों का निर्माण कराया जा रहा है। जिले में शासन भी आयुर्वेदिक पद्धति को बढ़ावा देने के लिए अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की तैयारी कर रही है। इसी कढी मैं 47.58 लाख रुपये की लागत से बेहरावल में भी आयुष अस्पताल स्थापित किया जा रहा हैं, जहां पर आयुर्वेद के साथ ही योग द्वारा उपचार किया जाएगा। कोरोना काल में भी लोगों ने एलोपैथिक पद्धति से अधिक आयुर्वेद का सहारा लिया है।  आयुर्वेदिक दवाओं व चूर्णों की बिक्री एलोपैथी की अपेक्षा अधिक रही। वर्तमान में लोगों का रुझान आयुर्वेदिक पद्धति की ओर बढ़ रहा है। शासकीय आयुर्वेदिक आरोग्य उप-स्वास्थ्य   का भूमि-पूजन क्षेत्रीय विधायक घनश्याम चन्द्रवशी द्वारा किया गया।  इस अस्पताल के बनने के बाद लोगों को इलाज के लिए गांव से शहर जाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।  इस दो मंजिला भवन बनने के बाद अस्पताल में आयुर्वेद और होम्योपैथी चिकित्सा का इलाज एक ही साथ लोगों को मिलेगा। अस्पताल बनने के बाद तकरीबन हजारों लोगों को इस अस्पताल से लाभ होगा। यह  तहसील मुख्यालय से महज  12 किमी दूर बनेगा, इसके लिए शासन ने इसकी मंजूरी दे दी है। आयुष अस्पताल में डाक्टरों की तैनाती के साथ-साथ यहां पर इलाज करवाने वाले मरीजों को सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 
  डॉ अर्चना शर्मा द्वारा आयुर्वेदिक आरोग्य उप-स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी देते हुए आयुर्वेदिक उपचार के लाभ को बताते हुए सम्बोधित किया।
इस अवसर पर अस्पताल के अधिकारी कर्मचारी सहित जनप्रतिनिधि व बडी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन त्रिवेणी अमृतिया ने किया ।
जिला आयुष अधिकारी दाताराम जयंत ने बताया कि आयुष अस्पताल बनने के बाद लोगों बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। और स्टाफ की कमी को पूरा किया जाएगा।
दाताराम जयंत, जिला आयुष अधिकारी टुडे एमपी एक्सप्रेस…… दिलीप महेश्वरी

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।