तेंदूखेड़ा ।विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल ने किया प्रदर्शनी का शुभारंभ

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तेंदूखेड़ा – राज्य सरकार के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में जनकल्याण पर्व प्रदेश में मनाया जा रहा है। इसी क्रम में विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल मुलायम भैया  ने फीता काटकर हॉकी स्टेडियम नरसिंहपुर में लगाई गई जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। राज्य सरकार की उपलब्धियों, निर्णयों, कार्यों, अभियानों आदि प्रदर्शनी के माध्यम से अवगत कराया गया। यहां जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व नागरिकों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शनी का अवलोकन किया।  इस अवसर पर गोटेगांव विधायक महेंद्र नागेश कलेक्टर श्रीमती शीतला पटले, सुनील कोठारी,  पंकज चौकसे, सीईओ जिला पंचायत  दलीप कुमार, सहायक संचालक जनसंपर्क विभाग  राहुल वासनिक सहित विभिन्न विभागों के जिला प्रमुख व कर्मचारी और नागरिक मौजूद थे। इस अवसर पर विधायक श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार पूर्ण रूप से जनहित के कार्य कर रही है। सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात सहित अन्य क्षेत्रों में विकास का कार्य कर रही है। हर ज़िले में उप स्वास्थ्य केन्द्र, सीएम राइज स्कूल और एक्सीलेंस कॉलेज खोले गये हैं। राज्य सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर उन्होंने सभी को शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा कि सुशासन के क्षेत्र में सभी के प्रयासों से जनता की शिकायतों का निराकरण कर रहे हैं स्टेडियम ग्राउंड नरसिंहपुर में आयोजित इस प्रदर्शनी में लोक निर्माण से लोक कल्‍याण, खेल सुविधाओं का निरंतर विस्‍तार, भू-जल रिचार्ज, नगरीय विकास के बढ़े परिवर्तन, मध्‍यप्रदेश में पर्यटन का नया अध्‍याय, साइबर तहसील से आसान हुए काम, बेहतर सुशासन के कड़े कदम, गौ-संरक्षण एवं संवर्धन, सांस्‍कृतिक एवं सामाजिक अभ्‍युदय, पर्यटन बना मध्‍यप्रदेश की नई पहचान, हमारा लक्ष्‍य जनकल्‍याण, जनजाति समाज को मिल रहा सहारा, कमजोर वर्ग को हर संभव मदद, त्‍वरित निर्णय तत्‍काल समाधान, सशक्‍त बन रही मध्‍यप्रदेश की नारी, अन्‍न दाताओं के साथ हर कदम पर सरकार, किसान कल्‍याण का पूरा हो रहा प्रण, नवकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन में अग्रणीय मध्‍यप्रदेश, शिक्षित होती आगे बढ़ती बेटियां, स्‍कूल शिक्षा को सुदृढ़ता, गुणात्‍मक और समावेशी शिक्षा का लक्ष्‍य, प्रगति के पथ पर मध्‍यप्रदेश, बढ़ता निवेश बढ़ता मध्‍यप्रदेश पर आधारित फोटो एवं उपलब्धियों की जानकारी प्रदर्शित की गई है।साथ ही प्रदर्शनी में व्‍यवसायिक कौशल पर केंद्रित शिक्षा, रोजगार के अवसरों का निर्माण, स्‍टार्टअप को प्रोत्‍साहन, आधुनिक चिकित्‍सा सेवाओं की गारंटी, मेडिसिटी, स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा के लिए संवेदनशील पहल, निवेश और रोजगार के बढ़ते अवसर, अधोसंरचना विकास और गति, औद्योगिक विकास के अभूतपूर्व विकास, जल स्‍त्रोतों के संरक्षण को समर्पित पहल, जन भागीदारी से जल संरक्षण, उद्योगों के लिए नई राहें, स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में रोजगार के अवसर, चिकित्‍सा शिक्षा को शामिल किया गया है। यह जनकल्‍याण प्रदर्शनी 15 दिसम्‍बर तक आमजनों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। जनप्रतिनिधियों ने जिले के नागरिकों से इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने का आग्रह किया है।संवाददाता- अमित खरे तेंदूखेड़ा

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।