धामनोद ।क्षेत्र का पहले देहदान ग्राम सुंद्रेल में नेत्रदान के बाद 100 को एमजीएम कॉलेज इंदौर ले गए परिजन

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धामनोद ।समीपस्थ ग्राम सुंद्रेल के समाजसेवी रमेश चंद्र पाटीदार लाडला के आज निधन के पश्चात परिजनों ने रविवार रात्रि उनके नेत्रदान रोटरी क्लब धामनोद के माध्यम से कराए वही देहदान के लिए सोमवार सुबह इंदौर एमजीएम कॉलेज भिजवाए असल में रविवार रात्रि निधन के बाद परिवार के सचिन पाटीदार ने रोटरी क्लब के प्रकाश राठौड़ से संपर्क किया और नेत्रदान एवं डेडान का कहा बताया कि मौसा जी के जीवित रहते उन्होंने 21 अगस्त 2012 में स्वयं की इच्छा से देहदान का फॉर्म भरा था आज से 12 साल पहले जब लोकनाट्राडन दे दान के बारे में कुछ समझते नहीं the जब उन्होंने देहदान का भर दिया था जिनकी काफी उनके परिवार के पास है सूचना मिलते ही रोटरी क्लब के सदस्य सकरी हुए और डेडान हेतु इंदौर के मुस्कान ग्रुप के संदीपन आर्य से संपर्क कर दे दान की प्रक्रिया को समझा तत्पश्चात रोटरी क्लब के नेत्रदान प्रभारी प्रकाश राठौड़ अध्यक्ष मनीष छाबड़ा सचिव शैलेंद्र जायसवाल और राहुल लठ धामनोद की डॉक्टर सुरेखा जैन और वार्ड बाय सुरेंद्र मंडलोई को साथ ले जाकर उनके निवास पर नेत्रदान की प्रक्रिया रात 10:00 बजे पूर्ण कार्रवाई सोमवार सुबह घर के प्रारंभिक रीति रिवाज पूर्ण करने के बाद पाटीदार की देह को परिवारजनों  के द्वारा चोइथराम मेडिकल कॉलेज इंदौर में तब  त्वचा। दान के  लिए ले जाया गया  उसके पश्चात महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में देहदान किया जाएगा
परिवार के भतीजे सचिन पाटीदार और नरेंद्र पाटीदार काका ने बताया कि रमेश चंद पाटीदार द्वारा 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा पैदल कर चुके हैं नेपाल काठमांडू की यात्रा भी पैदल संपन्न करी है दो बार नर्मदा परिक्रमा भी पैदल संपन्न करी है उन्होंने गांव-गांव नशा मुक्ति अभियान भी चलाया और समाज को नशे से दूर रहने का प्रेरणा दी इस दुनिया से विदा लेते समय नेत्र और त्वचा का दान कर गए और शरीर भी मेडिकल कॉलेज को दान कर गए इस दुखद घड़ी में परिवार द्वारा इतना बड़ा साक्षी निर्णय लेने पर क्लब की ओर से बहुत-बहुत साधुवाद भी दिया गया

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Hi

*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।