नर तेंदुआ की अज्ञात वाहन से मौत

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गौरझामर सागर से देवभूषण दुबे की रिपोर्ट

कल रात्रि सागर देवरी फोर लाइन गौरझामर थानांतर्गत बरकोटी और गुरु चोपड़ा के बीच घाटी में अज्ञात वाहन की टक्कर से एक नर तेंदुए घायल होकर मौके पर ही दम तोड़ दिया ।वन विभाग के अधिकारी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। मौके पर पंचनामा तैयार कर अज्ञात वाहन के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रकरण क्रमांक 2013/13 त पंजीबद्ध किया गया /आसपास घटनास्थल के दो-तीन किलोमीटर रेंज तक क्षतिग्रस्त वाहन की तलाशी की गई ।कोई भी वाहन क्षतिग्रस्त नहीं पाया गया। मृतक तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर रखकर जबलपुर ले जाकर उसका पोस्टमार्टम करवाया गया। वन विभाग ने अज्ञात वाहन पर प्रकरण दर्ज कर वाहन की तलाशी की जा रही है ।वन विभाग के पास यह मामला अभी संज्ञान में नहीं है कि आखिरकार तेंदुआ किस क्षेत्र से घटनास्थल पर पहुंचा? वन विभाग द्वारा पहले से क्या इसकी मनी ट्रेनिंग की जा रही थी? अगर मानटरिग की गई तो नजदीक से लगे इतने बड़े जंगल से तेंदुआ सडक पर क्यों आया?वन विभाग कई सवालों के घेरे घिर में चुका है ।वन विभाग की लापरवाही से तेंदुए की दुर्घटना में मौत हुई है ।वन विभाग अभी यह पता नहीं लग पाया कि तेंदुआ आखिरकार केसली रेंज या गोरझामर के जंगल से आया है। ढाना रेंज की रानगिर बीट से आया होता तो कहीं ना कहीं उसने किल जरूर किया होता। यह तो जांच का विषय है।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।