बिना में अचानक पहुंची रैपिड एक्शन फोर्स, निकाला फ्लैग मार्च

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बीना/क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने के तहत बीना में रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों ने मंगलवार को पैदल फ्लैग मार्च निकालकर क्षेत्र की गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान थाना प्रभारी ने लोगों से यदि घर रह रहे किराएदारों की पूरी जानकारी थाने में जमा कराने की अपील की।

दंगाइयों और संविधान से निलकों की सूची तैयार करने के निर्देश

रैपिड एक्शन फोर्स एसक्यू अख्तर जमाल ने बताया कि इसका उद्देश्य भौगोलिक, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक जानकारी एकत्रित करना और अति संवेदनशील इलाकों, बलवाइयों, दंगाइयों की सूची तैयार करना है। ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कोई संप्रदायिक तनाव और दंगे की स्थिति निर्मित होने पर उस पर नियंत्रण किया जा सके

इन स्थानों से निकाला फ्लैग मार्च

रैपिड एक्शन फोर्स ए/107 वाहिनी के प्लाटून कमांडर जगदीश प्रसाद बलाई के आदेश पर एसक्यू अख्तर जमाल और नंदीबाबू ओगिराला के नेतृत्व में पुलिस के साथ फ्लैग मार्च निकाला गया। जिसमें 43 अधिकारी, कर्मचारी रैपिड एक्शन फोर्स के शामिल रहे। एसक्यू अख्तर जमाल ने बताया कि बीना नगर के सर्वोदय चौराहा से पैदल फ्लैग मार्च निकाला गया, जो शहर के गांधी तिराहा, महावीर चौराहा, कच्चा रोड होते वापस थाने पहुंचा। थाना परिसर में कमांडेंट जगदीश प्रसाद बलाई के नेतृत्व में पौध रोपण किया गया। इस दौरान थाना प्रभारी भरतसिंह ठाकुर और स्टाफ भी मौजूद रहा।

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*कुंभकरण की नींद बड़ी या जल संसाधन विभाग की लापरवाही और हठ* *पर्वत सिंह राजपूत* रायसेन/वर्तमान समय में गेहूं की फसल के लिए खेत खाली हैं और गेहूं बुबाई हेतु खेतों की जुताई चालू है परंतु जो किसान डैम और नहरों पर निर्भर हैं उनके सामने गेहूं की फसल बोने की समस्या उत्पन्न होने वाली है क्योंकि डैमो से निकलने वाली नहर से खेतों तक पानी पहुंचता है वो नहरें जर्जर अवस्था में पड़ी है ! जबकि इस मामले में पिछले कई महीनो में कई बार रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा जी ने भी विभाग को निर्देशित किया था कि किसानों को पर्याप्त पानी मिले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जाए परंतु लगता है जल संसाधन विभाग कलेक्टर से बड़ा हो गया है क्योंकि अभी तक नहरों की साफ सफाई नहीं हुई है जिससे कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके। चाहे वह अमरावद डैम हो चाहे बनछोड़ डैम हो चाहे सोडारा डैम हो सभी डेमो के नहरों की हालत खराब है! एक दो जगह देखने में आया है नहरों मे साफ सफाई कराई जा रही है जबकि कई नहरे और उनके ऊपर अंडर पास ऐसे हैं जो टूटे हुए हैं और उनसे पानी लीकेज हो रहा है जबकि 1 नवंबर तक डैम के द्वारा नहरों को दुरुस्त करके पानी की सप्लाई शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन जल संसाधन विभाग की लापरवाही की वजह से अभी तक नहरों में पानी सप्लाई नहीं हो सका है। ना तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओ लेने को तैयार है और ना ही जल संसाधन अधिकारी।जब जिला मुख्यालय पर जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की ऐसी उदासीनता देखने को मिल रही है और नहरों के यह हाल है तो सोच सकते हैं कि पूरे जिले की स्थिति क्या होगी। जबकि नहरों की शिकायतों हेतु विभाग से लेकर कलेक्टर तक किसानों ने शिकायत की है और कई जगह 181 पर शिकायत की गई है! परंतु मजबूर और परेशान किसानों की सुनने वाला शायद कोई नहीं।